Floods in Assam: हर साल बाढ़ में क्यों डूबता है असम? समझिए ब्रह्मपुत्र के रौद्र रूप के पीछे का साइंस

असम एक बार फिर भीषण बाढ़ की चपेट में है, जिसमें अब तक 68 लोगों की जान जा चुकी है और 5.24 लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं। राज्य के पांच जिले बाढ़ की मार झेल रह
असम एक बार फिर भीषण बाढ़ की चपेट में है, जिसमें अब तक 68 लोगों की जान जा चुकी है और 5.24 लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं। राज्य के पांच जिले बाढ़ की मार झेल रहे हैं, जिनमें चराइदेव सबसे अधिक प्रभावित जिला है। हजारों विस्थापित लोग राहत शिविरों में रहने को मजबूर हैं। हर साल असम में बाढ़ आने का कारण राज्य की भौगोलिक स्थिति, जलवायु और ब्रह्मपुत्र नदी की विशेषताएं हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इन तीनों कारकों का अनोखा मेल असम में हर साल बाढ़ लाता है। ब्रह्मपुत्र नदी तिब्बत में यारलुंग त्सांगपो के नाम से निकलती है और अरुणाचल प्रदेश में प्रवेश करते ही इसका नाम बदलकर ब्रह्मपुत्र हो जाता है। इस नदी में हिमालय के ग्लेशियरों और भारी बारिश का जल शामिल होता है, जिससे इसका जलस्तर तेजी से बढ़ जाता है। असम एक संकरी घाटी में स्थित है, जिसके चारों ओर पहाड़ हैं। दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान बंगाल की खाड़ी से आने वाली नमी से भरी हवाएं इन पहाड़ों से टकराकर भारी वर्षा का कारण बनती हैं। इस बारिश का पानी सैकड़ों सहायक नदियों के माध्यम से ब्रह्मपुत्र में पहुंचता है, जिससे नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ता है। ब्रह्मपुत्र नदी दुनिया की सबसे अधिक गाद ढोने वाली नदियों में से एक है, जो असम के मैदानी इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ाती है। नदी की धाराएं लगातार अपना रास्ता बदलती हैं, जिससे तटबंधों को सुरक्षित रखना मुश्किल हो जाता है। असम में बाढ़ केवल स्थानीय बारिश की वजह से नहीं आती, बल्कि तिब्बत, अरुणाचल प्रदेश, भूटान और पूर्वोत्तर भारत में एक साथ भारी बारिश भी इसका कारण बनती है। जलवायु परिवर्तन के कारण पूर्वी हिमालय में अत्यधिक वर्षा की घटनाएं बढ़ रही हैं, जिससे बाढ़ की स्थिति और भी गंभीर हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि असम में बाढ़ को पूरी तरह खत्म करना संभव नहीं है, क्योंकि यह ब्रह्मपुत्र नदी के प्राकृतिक चक्र का हिस्सा है। हर साल आने वाली बाढ़ उपजाऊ मिट्टी लाती है और कृषि के लिए फायदेमंद होती है। हालांकि, इसके विनाशकारी असर को कम करने के लिए बेहतर फ्लड फोरकास्ट सिस्टम, वेटलैंड्स का संरक्षण और मजबूत तटबंधों की आवश्यकता है। असम की बाढ़ केवल मौसम की घटना नहीं है, बल्कि यह उसकी भौगोलिक स्थिति और ब्रह्मपुत्र नदी की प्रकृति का परिणाम है।









