Food adulteration in Chandigarh: मिलावटी खाने से किडनी और लिवर को खतरा

चंडीगढ़ में मिलावटी खाद्य पदार्थों की समस्या तेजी से बढ़ रही है, जिससे स्वास्थ्य पर गंभीर खतरे मंडरा रहे हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वा
चंडीगढ़ में मिलावटी खाद्य पदार्थों की समस्या तेजी से बढ़ रही है, जिससे स्वास्थ्य पर गंभीर खतरे मंडरा रहे हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा लोकसभा में पेश की गई एक रिपोर्ट में यह जानकारी सामने आई है कि पिछले पांच वर्षों में शहर में खाद्य पदार्थों के 2,149 सैंपल जांच के लिए लिए गए, जिनमें से 259 सैंपल मानकों पर खरे नहीं उतरे। यह आंकड़ा दर्शाता है कि लगभग 12 प्रतिशत सैंपल मिलावट के कारण फेल पाए गए हैं, यानी हर आठ में से एक सैंपल में मिलावट पाई गई है। खासकर डेयरी उत्पादों में मिलावट के मामले अधिक देखने को मिल रहे हैं, जो इस समस्या की गंभीरता को और बढ़ाते हैं।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि चंडीगढ़ में खाद्य पदार्थों में मिलावट का कारोबार तेजी से फैल रहा है। दूध, मसाले और अन्य खाद्य उत्पादों में मिलावट की जा रही है, जिससे लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय तक मिलावटी खाद्य पदार्थों का सेवन किडनी और लिवर जैसी गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है। दूध और अन्य खाद्य पदार्थों में यूरिया, डिटर्जेंट, स्टार्च और अन्य हानिकारक रसायनों की मिलावट की जा रही है, जो स्वास्थ्य के लिए अत्यंत खतरनाक हैं।
खाद्य सुरक्षा नियमों के उल्लंघन की रोकथाम के लिए प्रशासन द्वारा लगातार सैंपल लिए जा रहे हैं और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। पिछले पांच वर्षों में मिलावट और खाद्य सुरक्षा नियमों के उल्लंघन से जुड़े 301 मामलों में जुर्माना लगाया गया है, जबकि 75 मामलों में दोषियों को सजा सुनाई गई है। फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट, 2006 के तहत मिलावट, घटिया गुणवत्ता और बिना लाइसेंस खाद्य कारोबार करने पर सख्त कार्रवाई का प्रावधान है। यदि किसी व्यक्ति की मृत्यु असुरक्षित खाद्य पदार्थ के सेवन से होती है, तो दोषी को न्यूनतम सात वर्ष से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा हो सकती है। इस प्रकार की सख्त सजा और जुर्माना खाद्य सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक हैं।









