Fraudulent Agreement in Rape Case: दुष्कर्म मामले में फर्जी समझौता पत्र का मामला

उन्नाव से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां दुष्कर्म के आरोपियों ने सजा से बचने के लिए उच्च न्यायालय में पीड़िता का फर्जी समझौता पत्र पेश किया। यह घटना उ
उन्नाव से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां दुष्कर्म के आरोपियों ने सजा से बचने के लिए उच्च न्यायालय में पीड़िता का फर्जी समझौता पत्र पेश किया। यह घटना उस समय की है जब दुष्कर्म पीड़िता न्यायालय में न्याय की उम्मीद लगाए बैठी थी। आरोपियों ने एक अधिवक्ता के साथ मिलकर एक कूटरचित समझौता और शपथ पत्र तैयार किया, जिसमें पीड़िता के दस्तखत भी लगाए गए थे। जब पीड़िता को इस धोखाधड़ी का पता चला, तो उसने तुरंत इस समझौते से इन्कार कर दिया। उच्च न्यायालय ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस को जांच के आदेश दिए। इसके बाद पुलिस ने इस मामले में धोखाधड़ी की पुष्टि की और आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की।
इस मामले की शुरुआत वर्ष 2022 में हुई थी, जब पीड़िता ने थाना फतेहपुर चौरासी में रामबाबू के खिलाफ दुष्कर्म, मारपीट और धमकी का मुकदमा दर्ज कराया था। मामला उन्नाव की न्यायालय में विचाराधीन था। रामबाबू को अपनी सजा का डर था, इसलिए उसने अपने सहयोगी खुशीराम और अधिवक्ता सुरेश कुमार यादव के साथ मिलकर एक योजना बनाई। उन्होंने मिलकर एक फर्जी समझौता पत्र तैयार किया और उसे उच्च न्यायालय में दाखिल कर दिया। इस समझौते पर 15 दिसंबर 2025 की तारीख अंकित थी, जबकि स्टांप 24 फरवरी 2026 को खरीदे गए थे। यह स्पष्ट था कि आरोपियों ने जानबूझकर इस दस्तावेज को तैयार किया था।
जब दुष्कर्म पीड़िता को इस फर्जी समझौते की जानकारी मिली, तो उसने उच्च न्यायालय को सूचित किया कि उसने किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया है। 11 मई 2026 को उच्च न्यायालय में सुनवाई के दौरान उसे इस फर्जी दस्तावेज का पता चला। उच्च न्यायालय ने मामले की जांच के लिए एसपी जयप्रकाश सिंह को निर्देश दिए। जांच में पाया गया कि आरोपियों ने फर्जी हस्ताक्षर कर कूटरचित दस्तावेज तैयार किए थे। इसी आधार पर 25 जुलाई 2026 को विभूतिखंड थाने में रामबाबू, खुशीराम और अधिवक्ता सुरेश कुमार यादव के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। एएसपी दक्षिणी शैलेंद्र लाल ने इस मामले की जांच की पुष्टि की है और कहा है कि आरोपियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी।









