Fruit cultivation in Kaimur: किन्नू, अमरूद और शरीफा की बागवानी के लिए किसानों को मिलेगी सब्सिडी

भभुआ से जागरण संवाददाता की रिपोर्ट के अनुसार, कैमूर जिले में एकीकृत बागवानी विकास मिशन के तहत किन्नू, अमरूद और शरीफा फलों की बागवानी को बढ़ावा देने का निर्णय लि
भभुआ से जागरण संवाददाता की रिपोर्ट के अनुसार, कैमूर जिले में एकीकृत बागवानी विकास मिशन के तहत किन्नू, अमरूद और शरीफा फलों की बागवानी को बढ़ावा देने का निर्णय लिया गया है। इस योजना के अंतर्गत किसानों को परंपरागत गेहूं और धान की खेती के साथ-साथ फलों की बागवानी करने का अवसर मिलेगा, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार होगा। जिला उद्यान पदाधिकारी डॉ. अभय कुमार गौरव ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2026-27 के दौरान तीन फलों की बागवानी के लिए 25-25 हेक्टेयर का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। यह बागवानी जिले की चयनित तीन पंचायतों में क्लस्टर के रूप में की जाएगी। इस पहल से किसानों को न केवल नई फसलें उगाने का अवसर मिलेगा, बल्कि वे अपनी आय में भी वृद्धि कर सकेंगे।
डॉ. गौरव ने आगे बताया कि जिले में 25 हेक्टेयर में किन्नू, 25 हेक्टेयर में अमरूद और 25 हेक्टेयर में शरीफा की बागवानी की जाएगी। इस बागवानी पर किसानों को प्रति हेक्टेयर 12 लाख रुपये की लागत पर अनुदान दिया जाएगा, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूती मिलेगी। उद्यान विभाग द्वारा किसानों को विभिन्न प्रकार की बागवानी के लिए प्रेरित किया जा रहा है। इससे पहले, जिले में केला, नारियल और अन्य फलों की बागवानी भी कराई गई थी। इस बार किन्नू, अमरूद और शरीफा की बागवानी का लक्ष्य प्राप्त हुआ है, जो किसानों के लिए एक नई शुरुआत साबित होगा।
कैमूर जिले को धान के कटोरे के रूप में जाना जाता है, जहां से उत्पादित चावल की आपूर्ति प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में की जाती है। यहां के किसान पूरी तरह से खेती पर निर्भर हैं, और उनकी जीवनशैली कृषि पर आधारित है। मोकरी गांव के गोबिंद भोग चावल को अयोध्या में भगवान को भोग लगाने के लिए भेजा जाता है, जो इस क्षेत्र की कृषि परंपरा को दर्शाता है। इस नई योजना के तहत, किसानों को फलों की बागवानी के माध्यम से अपनी आय बढ़ाने का एक सुनहरा अवसर मिलेगा, जिससे न केवल उनके जीवन स्तर में सुधार होगा, बल्कि क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।









