FSL report reveals forged signatures: फ्लैट बिक्री मामले में FIR की सिफारिश

जीरकपुर (मोहाली) से संवाद सहयोगी की रिपोर्ट के अनुसार, भबात स्थित हाईलैंड पार्क टेरेसेस में एक फ्लैट की फर्जी बिक्री के मामले में पुलिस को महत्वपूर्ण सबूत मिले
जीरकपुर (मोहाली) से संवाद सहयोगी की रिपोर्ट के अनुसार, भबात स्थित हाईलैंड पार्क टेरेसेस में एक फ्लैट की फर्जी बिक्री के मामले में पुलिस को महत्वपूर्ण सबूत मिले हैं। फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (एफएसएल) की हालिया रिपोर्ट में यह पुष्टि की गई है कि फ्लैट की रजिस्ट्री के लिए इस्तेमाल किए गए अथॉरिटी लेटर पर किए गए हस्ताक्षर जीवीवी कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड के निदेशकों के वास्तविक हस्ताक्षरों से मेल नहीं खाते। इस रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने वरिष्ठ अधिकारियों को अपनी जांच भेजते हुए आपराधिक मामला दर्ज करने की सिफारिश की है। यह मामला कंपनी के अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता रफी मोहम्मद की शिकायत पर शुरू हुआ था।
शिकायत में बताया गया है कि कंपनी के पूर्व लायजनर भूपिंदर सिंह ने एक फर्जी अथॉरिटी लेटर तैयार कर 21 मई 2025 को कंपनी के स्वामित्व वाले फ्लैट की रजिस्ट्री अमनदीप सिंह के नाम कर दी। कंपनी का कहना है कि भूपिंदर सिंह को किसी भी अचल संपत्ति की बिक्री का अधिकार नहीं दिया गया था, उसकी नियुक्ति केवल सिंचाई परियोजना से जुड़े स्थानीय समन्वय कार्यों के लिए की गई थी। कंपनी ने आरोप लगाया है कि भूपिंदर सिंह ने 12 मई 2025 को एक जाली अथॉरिटी लेटर तैयार कर निदेशकों के फर्जी हस्ताक्षर किए और उसी के आधार पर फ्लैट की रजिस्ट्री करवा दी। कंपनी का दावा है कि बिक्री की कोई राशि उसके खाते में नहीं आई और फ्लैट पर आज भी उसका कब्जा है।
जांच के दौरान भूपिंदर सिंह ने आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि कंपनी पर उसके करीब 52 लाख रुपये बकाया थे और उसी राशि की सुरक्षा के लिए उसे फ्लैट बेचने का अधिकार दिया गया था। उसने यह भी कहा कि कंपनी ने उसे पहले भी अन्य संपत्तियों की बिक्री के लिए अधिकृत किया था। दूसरी ओर, फ्लैट खरीदने वाले अमनदीप सिंह ने पुलिस को बताया कि उसने पूरी भुगतान राशि देकर कानूनी प्रक्रिया के तहत फ्लैट खरीदा है और उसके नाम पर रजिस्ट्री, इंतकाल और बिजली कनेक्शन दर्ज हैं। पुलिस ने विवादित अथॉरिटी लेटर पर किए गए हस्ताक्षरों की एफएसएल से जांच कराई, जिसमें हस्ताक्षर वास्तविक हस्ताक्षरों से मेल नहीं खाने की पुष्टि हुई। अधिकारियों का कहना है कि अंतिम मंजूरी मिलने के बाद जालसाजी, धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश समेत भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं में एफआईआर दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जाएगी।









