Meta, X and Google: गडकरी की मानहानि याचिका पर 5 अगस्त को सुनवाई

बॉम्बे हाई कोर्ट ने मंगलवार को यह स्पष्ट किया कि वह केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के खिलाफ अपलोड किए गए मानहानिपूर्ण डीपफेक और एआई-जनरेटे
बॉम्बे हाई कोर्ट ने मंगलवार को यह स्पष्ट किया कि वह केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के खिलाफ अपलोड किए गए मानहानिपूर्ण डीपफेक और एआई-जनरेटेड पोस्ट के मामले में मेटा, एक्स कॉर्प, गूगल एलएलसी और अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ दायर मानहानि याचिका पर पांच अगस्त को सुनवाई करेगा। यह मामला गडकरी की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने वाले फर्जी कंटेंट से संबंधित है, जिसमें उन्हें एथनॉल नीति के लिए व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराया गया है। जस्टिस आरिफ डॉक्टर की पीठ ने इस मामले की सुनवाई के दौरान गडकरी के वकील संदीप लड्डा को निर्देश दिया कि वे प्रतिवादियों को दीवानी मुकदमे की प्रति उपलब्ध कराएं। इस मुकदमे में उन फर्जी और मनगढ़ंत कंटेंट को तुरंत हटाने की मांग की गई है, जिनसे गडकरी की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा है।
याचिका में यह भी कहा गया है कि अज्ञात व्यक्तियों ने ऐसे पोस्ट और डीपफेक कंटेंट को अपलोड और शेयर किया है, जिसमें गडकरी और उनके परिवार को एथनॉल कार्यक्रम से व्यक्तिगत लाभ होने का आरोप लगाया गया है। इस प्रकार के आरोपों से गडकरी की प्रतिष्ठा और व्यक्तित्व को अपूरणीय क्षति पहुंची है। याचिका में यह स्पष्ट किया गया है कि ऑनलाइन पोस्ट में लगाए गए आरोप झूठे, दुर्भावनापूर्ण और मानहानिपूर्ण हैं, जिनका उद्देश्य गडकरी के बारे में लोगों में गलत धारणा बनाना है। गडकरी ने यह भी स्पष्ट किया है कि एथनॉल मिश्रण कार्यक्रम और ई-20 नीति का संचालन पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय करता है, न कि वह व्यक्तिगत रूप से।
गडकरी की याचिका में यह भी उल्लेख किया गया है कि निष्पक्ष सार्वजनिक बहस या सही टिप्पणियों को दबाने का कोई प्रयास नहीं किया जा रहा है। इसके साथ ही, यह भी कहा गया है कि गैर-जिम्मेदार और मानहानिपूर्ण आरोपों ने कानूनी अभिव्यक्ति की सीमा को पार कर लिया है। इस मामले की सुनवाई से यह स्पष्ट होगा कि क्या गडकरी के खिलाफ लगाए गए आरोपों में कोई सच्चाई है या यह केवल उनकी छवि को धूमिल करने का प्रयास है। इस मामले में सुनवाई के दौरान कोर्ट द्वारा दिए गए निर्देशों का पालन किया जाएगा, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि गडकरी की प्रतिष्ठा की रक्षा हो सके। (समाचार एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)









