Global Protests After Death of Lobga Rangzen: लोबगा रांगजेन की मौत के बाद तिब्बती समुदाय का वैश्विक प्रदर्शन, संयुक्त राष्ट्र से न्याय की मांग

धर्मशाला स्थित तिब्बती यूथ कांग्रेस ने तिब्बती कार्यकर्ता लोबगा रांगजेन, जिन्हें लोसांग पालदेन के नाम से भी जाना जाता है, के आत्मदाह के बाद वैश्विक स्तर पर चल र
धर्मशाला स्थित तिब्बती यूथ कांग्रेस ने तिब्बती कार्यकर्ता लोबगा रांगजेन, जिन्हें लोसांग पालदेन के नाम से भी जाना जाता है, के आत्मदाह के बाद वैश्विक स्तर पर चल रहे चेन प्रदर्शन को और व्यापक बनाने का ऐलान किया है। इस संगठन का कहना है कि यह शांतिपूर्ण अभियान तब तक जारी रहेगा, जब तक संयुक्त राष्ट्र उनकी मांगों पर प्रतिक्रिया नहीं देता। तिब्बती यूथ कांग्रेस के महासचिव तेनज़िन लोबसांग ने बताया कि यह आंदोलन शहीद लोबगा रांगजेन के लिए न्याय की मांग को लेकर चलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि धर्मशाला में 19 जुलाई से चेन भूख हड़ताल जारी है, जो तिब्बती लोगों के अधिकारों, न्याय और सत्य के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का प्रतीक है। तेनज़िन लोबसांग ने कहा कि न्यूयॉर्क और न्यू जर्सी में तिब्बती समुदाय और समर्थक प्रत्येक बुधवार और शनिवार को संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय के बाहर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे हैं। उनका कहना है कि यह वैश्विक अभियान तब तक जारी रहेगा, जब तक संयुक्त राष्ट्र उनकी मांगों पर कोई ठोस प्रतिक्रिया नहीं देता। तिब्बती यूथ कांग्रेस की संयुक्त सचिव तेनज़िन डेकोंग ने कहा कि यह विश्वव्यापी अभियान धर्मशाला से शुरू हुआ है और इसका उद्देश्य दुनिया भर के तिब्बती समुदाय को एकजुट करना है। उन्होंने कहा कि लोबगा रांगजेन ने आत्मदाह से पहले तिब्बती लोगों से एकजुट होकर अपनी आवाज बुलंद करने का संदेश दिया था। उन्होंने तिब्बती समुदाय से आंदोलन में सक्रिय भागीदारी की अपील करते हुए कहा कि संयुक्त राष्ट्र के समक्ष अपनी मांगों को मजबूती से उठाना जरूरी है, ताकि भविष्य में तिब्बती लोग अपने वतन लौट सकें। गौरतलब है कि संगठन के अनुसार तिब्बती कार्यकर्ता लोबगा रांगजेन ने न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय के बाहर आत्मदाह किया था। इसी घटना के बाद तिब्बती यूथ कांग्रेस ने विभिन्न देशों में शांतिपूर्ण चेन प्रदर्शन शुरू किया है। यह आंदोलन न केवल तिब्बती समुदाय के लिए, बल्कि मानवाधिकारों के लिए भी एक महत्वपूर्ण संदेश है। तिब्बती यूथ कांग्रेस का यह प्रयास दर्शाता है कि वे अपने अधिकारों के लिए किस तरह से प्रतिबद्ध हैं और वे अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी आवाज उठाने के लिए कितने गंभीर हैं। इस प्रकार के प्रदर्शन वैश्विक स्तर पर तिब्बती मुद्दे को उजागर करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन गए हैं, जिससे अन्य देशों में भी तिब्बती लोगों के अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ रही है।









