Gold Medal at Commonwealth Games: मां ने दुनिया के ताने सुनकर भी मेरा साथ दिया, शर्मिला धनखड़

रेवाड़ी से जागरण संवाददाता की रिपोर्ट के अनुसार, कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण पदक जीतने वाली शर्मिला धनखड़ ने अपनी मां संतोष देवी को समर्पित करते हुए कहा कि उनकी
रेवाड़ी से जागरण संवाददाता की रिपोर्ट के अनुसार, कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण पदक जीतने वाली शर्मिला धनखड़ ने अपनी मां संतोष देवी को समर्पित करते हुए कहा कि उनकी मां ने जीवनभर संघर्ष किया और दुनिया के ताने सुनकर भी उनका साथ नहीं छोड़ा। शर्मिला ने यह पदक अपनी मां को समर्पित किया है, जिन्होंने कठिन परिस्थितियों में भी उन्हें प्यार और समर्थन दिया। शर्मिला की मां, जो जन्म से दृष्टिबाधित हैं, ने अपने जीवन में कई चुनौतियों का सामना किया है। उन्होंने अपने बच्चों की परवरिश के लिए कठिन मेहनत की और उन्हें हमेशा आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। शर्मिला का परिवार हमेशा से ही संघर्ष करता आया है। उनके भाई नवीन, जो रेवाड़ी में ऑटो चलाते हैं, और दिव्यांग पिता जयलाल, जिनका दो वर्ष पहले निधन हो गया, ने भी परिवार के लिए कठिनाइयों का सामना किया। वर्तमान में, संतोष देवी अपने बेटे नवीन और भाभी के साथ रेवाड़ी में किराए के मकान में रहती हैं, लेकिन उनका गांव छीतरौली से गहरा लगाव बना हुआ है। हर सप्ताह वह अपने गांव जाती हैं, जहां उनका स्वागत होता है। शर्मिला की मां ने अपनी बेटी की सफलता पर गर्व करते हुए कहा कि उन्हें ज्यादा बोलना नहीं आता, लेकिन उन्हें अपनी बेटी की उपलब्धियों पर बहुत खुशी है। शर्मिला के स्वर्ण पदक जीतने की खबर सुनकर उनकी मां की आंखों में आंसू आ गए। भाई नवीन ने इस उपलब्धि को पूरे परिवार के संघर्ष की जीत बताया है। शर्मिला की मेहनत और उनकी मां के संघर्ष ने उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया है। यह कहानी केवल एक स्वर्ण पदक की नहीं, बल्कि एक मां और बेटी के अटूट रिश्ते की है। संतोष देवी ने अपनी बेटी की सफलता पर गर्व करते हुए कहा कि यह उनके लिए एक सपना सच होने जैसा है। शर्मिला ने अपनी मां के संघर्षों को याद करते हुए कहा कि यह पदक उनकी मां के लिए है, जिन्होंने हमेशा उनका साथ दिया। इस तरह, शर्मिला धनखड़ ने न केवल अपने देश का नाम रोशन किया है, बल्कि अपनी मां के बलिदान को भी सम्मानित किया है।









