Gorakhpur Murder Case: एआई से सीखी फिरौती की चाल, 'लॉरेंस बिश्नोई' गैंग का नाम लिया गया

गोरखपुर में एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जहां एक कंप्यूटर एक्सपर्ट ने एआई की मदद से एक हत्या की साजिश रची। सर्वेश नामक आरोपी ने न केवल फिरौती मांगन
गोरखपुर में एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जहां एक कंप्यूटर एक्सपर्ट ने एआई की मदद से एक हत्या की साजिश रची। सर्वेश नामक आरोपी ने न केवल फिरौती मांगने के तरीके सीखे, बल्कि उसने 'लॉरेंस बिश्नोई' गैंग का नाम भी इस्तेमाल किया ताकि वह अपने इरादों में सफल हो सके। घटना के अनुसार, अपहरण के कुछ ही मिनटों बाद हनुमान वर्मा के मोबाइल पर कंबोडिया और फिलीपींस के वर्चुअल नंबरों से टेक्सट मैसेज भेजे गए। पहले संदेश में केवल 'हाय' लिखा गया, लेकिन इसके बाद लगातार 25 संदेश भेजे गए, जिनमें 'लॉरेंस बिश्नोई' का नाम शामिल था। इस संदिग्ध गतिविधि ने पुलिस को सतर्क कर दिया, लेकिन गहराई से जांच करने पर सच्चाई सामने आई। पुलिस ने बताया कि पहले संदेश के बाद से लेकर 3:23 बजे तक, हनुमान वर्मा के मोबाइल पर कई टेक्स्ट मैसेज आए, लेकिन उनका ध्यान नहीं गया क्योंकि उस समय उनका फोन उनके दूसरे बेटे आकाश के पास था। जब पुलिस ने परिवार के सभी मोबाइल फोन जब्त किए और जांच शुरू की, तब यह चैट सामने आई। जांच में यह भी पता चला कि सर्वेश ने इन वर्चुअल नंबरों को 199 रुपये में खरीदा था।
पुलिस अधिकारियों का मानना है कि सर्वेश ने यह योजना इसलिए बनाई ताकि परिवार और पुलिस को लगे कि यह मामला किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क या कुख्यात गैंग से जुड़ा हुआ है। उसकी योजना थी कि परिवार भयभीत हो जाए और फिरौती बिना किसी विरोध के दे दे। उसने एक करोड़ रुपये से अधिक की फिरौती मांगने की योजना बनाई थी और इसके लिए एक फर्जी बैंक खाता भी तैयार किया था। हालांकि, उसकी योजना में एक बड़ी कमी रह गई। जांच में यह तथ्य सामने आया कि सर्वेश ने दर्जनों मैसेज भेजे, लेकिन किसी भी संदेश में फिरौती की रकम नहीं मांगी गई। यही बात पुलिस के लिए संदिग्ध साबित हुई। साइबर जांच और पूछताछ में यह स्पष्ट हो गया कि 'लॉरेंस बिश्नोई' गैंग का नाम केवल डर फैलाने के लिए इस्तेमाल किया गया था। पुलिस ने अब तक की जांच में इस गैंग से किसी भी तरह का संबंध नहीं पाया है।









