Government Takes Action After Death of Indian Citizen in Commercial Ship Attack: कमर्शियल जहाज पर हमले में भारतीय नागरिक की मौत पर एक्शन में सरकार, यूक्रेन के राजदूत तलब

ब्लैक सी में कमर्शियल जहाज पर हुए हमले में भारतीय नाविकों की मौत के बाद भारत ने एक सख्त रुख अपनाया है। विदेश मंत्रालय ने सोमवार, 27 जुलाई को भारत में यूक्रेन के
ब्लैक सी में कमर्शियल जहाज पर हुए हमले में भारतीय नाविकों की मौत के बाद भारत ने एक सख्त रुख अपनाया है। विदेश मंत्रालय ने सोमवार, 27 जुलाई को भारत में यूक्रेन के राजदूत डॉ. ओलेक्सांद्र पोलिशचुक को तलब किया और इस घटना को लेकर अपनी गंभीर चिंता व्यक्त की। यह मामला कॉमर्शियल जहाज MV OMORFI पर हुए हमले से संबंधित है, जिसमें एक भारतीय नागरिक की जान गई। विदेश मंत्रालय ने यूक्रेनी राजदूत के समक्ष कमर्शियल जहाजों पर इस प्रकार के हमलों की कड़ी निंदा की और कहा कि इस तरह की घटनाएं समुद्री सुरक्षा, स्वतंत्र नौवहन और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर गंभीर प्रभाव डालती हैं। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि ऐसी कार्रवाइयों से निर्दोष नागरिक नाविकों की जिंदगी को खतरा होता है और इसे किसी भी हाल में स्वीकार नहीं किया जा सकता। भारत ने यह भी कहा कि भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचने के लिए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है और समुद्री रास्तों से आवाजाही करने वाले नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए।
रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे संघर्ष को लगभग साढ़े चार साल हो चुके हैं और दोनों देशों के बीच तनाव लगातार बना हुआ है। सोमवार को भारत स्थित यूक्रेनी दूतावास ने एक प्रेस रिलीज जारी कर आरोप लगाया कि रूस की कार्रवाइयों के कारण ब्लैक सी और सी ऑफ अजोव में विदेशी जहाजों और नागरिक आवाजाही के लिए खतरा बढ़ गया है। यूक्रेन ने इस मामले में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर दिया है। यूक्रेनी दूतावास के अनुसार, 2025-26 के दौरान ब्लैक सी में रूस के हमलों में कई नाविकों, समुद्री पायलटों और व्यापारिक जहाजों के क्रू मेंबर्स की जान गई है। इनमें बंदरगाहों के बुनियादी ढांचे और यूक्रेन के समुद्री एक्सपोर्ट कॉरिडोर का उपयोग करने वाले जहाजों पर हुए हमले भी शामिल हैं। यूक्रेन का कहना है कि वह युद्ध के दौरान भारत के वरिष्ठ अधिकारियों समेत अपने अंतरराष्ट्रीय साझेदारों को ब्लैक सी में नागरिक जहाजों के लिए बढ़ते खतरे के बारे में लगातार आगाह करता रहा है। इस मुद्दे को इंटरनेशनल मैरीटाइम ऑर्गेनाइजेशन के सामने भी उठाया गया है।









