Government Criticized in Parliament: दीपेंद्र हुड्डा ने Gen-Z के नारों का किया जिक्र

डिजिटल डेस्क, रोहतक। लोकसभा में 'लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026' पर चर्चा के दौरान रोहतक के सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने सरकार पर तीखा हमला बो
डिजिटल डेस्क, रोहतक। लोकसभा में 'लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026' पर चर्चा के दौरान रोहतक के सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि इस बिल के पीछे की परिस्थितियां स्पष्ट करती हैं कि यह सरकार इस विधेयक को न तो मन से, न दिल से और न ही दिमाग से लेकर आई है। हुड्डा ने आरोप लगाया कि सरकार का असली इरादा युवाओं की आवाज को दबाना और कुचलना था। जब स्थिति गंभीर हो गई और सरकार को यह एहसास हुआ कि अब उनका सिंहासन डोलने लगा है, तब उन्होंने इस बिल की घोषणा की। उन्होंने कहा कि यह सरकार केवल नैरेटिव की सरकार है और जब नैरेटिव खराब होने लगा, तब उन्होंने इस बिल को पेश किया। प्रधानमंत्री की सोशल मीडिया पर सक्रियता और इस्तीफे की बातें भी इस संदर्भ में आईं, लेकिन हुड्डा का कहना था कि यह सब मन से नहीं किया गया है।
हुड्डा ने विधेयक के प्रावधानों पर भी सवाल उठाए और कहा कि यह बिल पहले भी 2004 में बनाया गया था, जिसमें अब केवल सजा का प्रावधान बढ़ाया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर वास्तव में कानून बनाना था, तो पहली शर्त यह होनी चाहिए थी कि अगली बार NEET का पेपर लीक होने पर सबसे पहले शिक्षा मंत्री का इस्तीफा होना चाहिए। उन्होंने फास्ट ट्रैक कोर्ट की स्थापना को बीजेपी का नया जुमला बताया और कहा कि देश में वर्तमान में 800 फास्ट ट्रैक कोर्ट चल रहे हैं, जिनमें ढाई लाख मामले लंबित हैं। हुड्डा ने यह भी कहा कि सरकार ने 60 दिन में जांच का काम सीबीआई को सौंपा है, जबकि सीबीआई 2024 के पेपर लीक के खिलाफ एक भी सबूत पेश नहीं कर पाई है। उन्होंने आरोप लगाया कि सीबीआई का उपयोग विपक्ष के खिलाफ किया जा रहा है।









