Graduation Ceremony at Kashi Vidyapeeth: अगले साल से नहीं देनी होगी डिग्री की फीस, सॉफ्ट कॉपी ही डिजीलॉकर पर होगी अपलोड

महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के 48वें दीक्षांत समारोह में एक अनोखा रिकॉर्ड स्थापित किया गया। इस समारोह के दौरान, मात्र 25 सेकंड के भीतर 63060 डिग्रियां डिजीलॉकर
महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के 48वें दीक्षांत समारोह में एक अनोखा रिकॉर्ड स्थापित किया गया। इस समारोह के दौरान, मात्र 25 सेकंड के भीतर 63060 डिग्रियां डिजीलॉकर पर अपलोड की गईं। यह कार्य राज्यपाल और विद्यापीठ की कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने एक क्लिक के माध्यम से किया। उन्होंने अपने दीक्षांत भाषण में यह घोषणा की कि अगले वर्ष से डिग्री प्राप्त करने के लिए किसी भी प्रकार की फीस का भुगतान नहीं करना होगा। यह प्रक्रिया सीधे डिजीलॉकर के माध्यम से पूरी की जाएगी, जिससे फर्जीवाड़े की संभावनाएं कम होंगी और छात्रों को आसानी होगी। इस नई व्यवस्था से छात्रों को डिजिटल माध्यम से अपनी डिग्रियां प्राप्त करने में सुविधा होगी, जो कि वर्तमान समय की आवश्यकता है।
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने अपने भाषण में मातृभाषा के महत्व पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि जब विद्यार्थी अपनी मातृभाषा में पढ़ाई करते हैं, तो उनका आत्मविश्वास बढ़ता है। नई शिक्षा नीति (एनईपी) में मातृभाषा को प्राथमिकता दी गई है, लेकिन इसके बावजूद कई लोग अंग्रेजी को प्राथमिकता दे रहे हैं। उन्होंने बताया कि माई भारत एप के माध्यम से अब तक दो करोड़ से अधिक युवा इस अभियान से जुड़ चुके हैं। इस पहल के तहत समाज के विभिन्न वर्गों से एक लाख युवा नेताओं का निर्माण किया जाएगा, जो भविष्य में समाज में सकारात्मक बदलाव लाने में सहायक होंगे।
राज्यपाल ने काशी विद्यापीठ के शिक्षण पद्धतियों की सराहना करते हुए कहा कि यह संस्थान देश की नई शिक्षा नीति का पालन करते हुए आधुनिक शिक्षण विधियों और डिजिटल तकनीकों को एकीकृत कर रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री के वर्षा जल संरक्षण अभियान 'कैच द रेन' को बढ़ावा देने की अपील की। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण और वृक्षारोपण जैसे प्रयासों को जन आंदोलन में बदलना आवश्यक है। भारत में ऋषि-मुनियों द्वारा रचित अमूल्य पांडुलिपियों के ज्ञान और विज्ञान अनुसंधान की धरोहर को डिजिटल रूप में संरक्षित किया जा रहा है, जिससे आने वाली पीढ़ियों को इसका लाभ मिल सके।









