GST Council Meeting: कारोबारियों को मिलेगी राहत, रजिस्ट्रेशन और रिफंड प्रोसेस होगा आसान

नई दिल्ली से जागरण ब्यूरो की रिपोर्ट के अनुसार, जीएसटी काउंसिल की आगामी बैठक में कारोबारियों को राहत मिलने की संभावना है। यह बैठक संसद के मानसून सत्र के बाद आयो
नई दिल्ली से जागरण ब्यूरो की रिपोर्ट के अनुसार, जीएसटी काउंसिल की आगामी बैठक में कारोबारियों को राहत मिलने की संभावना है। यह बैठक संसद के मानसून सत्र के बाद आयोजित की जाएगी। पिछले साल सितंबर में जीएसटी काउंसिल की 56वीं बैठक में जीएसटी दरों के स्लैब में बड़े बदलाव किए गए थे, जिसके परिणामस्वरूप कई रोजमर्रा की वस्तुएं सस्ती हो गई थीं। हालांकि, जीएसटी विशेषज्ञों का मानना है कि हर तीन महीने में एक बार जीएसटी काउंसिल की बैठक का आयोजन होना चाहिए, लेकिन पिछले 10 महीनों से इस बैठक का आयोजन नहीं किया गया है। मानसून सत्र 13 अगस्त को समाप्त हो रहा है, जिसके बाद इस बैठक की संभावना बढ़ गई है।
सूत्रों के अनुसार, पिछली बैठक में उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिलने के बाद अब कारोबारियों को राहत देने की दिशा में कदम उठाए जा सकते हैं। वर्तमान में, कारोबारियों को विभिन्न राज्यों में व्यापार करने के लिए अलग-अलग पंजीकरण कराना पड़ता है। आगामी बैठक में इस पंजीकरण प्रक्रिया को केंद्रीकृत करने का निर्णय लिया जा सकता है, जिससे कारोबारियों को एक ही स्थान पर पंजीकरण कराने की सुविधा मिलेगी। इसके अलावा, इंवर्टेड ड्यूटी और इनपुट टैक्स क्रेडिट के रिफंड में तेजी लाने के विषय पर भी चर्चा होने की संभावना है। कई बार कच्चे माल पर अधिक शुल्क और तैयार माल पर कम शुल्क होने के कारण रिफंड लेने में समस्याएं आती हैं।
इस बैठक में यह भी देखा जाएगा कि यदि किसी कारोबारी ने जीएसटी फाइल नहीं किया है, तो भी निर्माता को इनपुट टैक्स रिफंड नहीं मिल पाता है। इस प्रकार के नियमों के कारण कारोबारियों को रिफंड प्राप्त करने में देरी होती है, जिससे उनकी पूंजी फंस जाती है। हालांकि, सूत्रों का कहना है कि आगामी बैठक में पेट्रोल-डीजल पर चर्चा की संभावना नहीं है। मार्च में पश्चिम एशिया संकट के दौरान इस विषय पर चर्चा हुई थी कि पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के दायरे में लाया जाए, ताकि ग्राहकों को केंद्र और राज्य दोनों को अलग-अलग टैक्स न देना पड़े। लेकिन जानकारों का मानना है कि पेट्रोल-डीजल पर लगने वाला वैट राज्य सरकारों के राजस्व का एक महत्वपूर्ण स्रोत है, और कोई भी राज्य सरकार इसे छोड़ने के लिए तैयार नहीं होगी।









