Gujarat High Court's Major Ruling: तलाकशुदा महिला को मिला विधवा का दर्जा, बच्चों को भी संपत्ति का हक

गुजरात उच्च न्यायालय ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है जिसमें एक तलाकशुदा महिला को विधवा का दर्जा दिया गया है। यह मामला उस महिला से संबंधित है जिसने
गुजरात उच्च न्यायालय ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है जिसमें एक तलाकशुदा महिला को विधवा का दर्जा दिया गया है। यह मामला उस महिला से संबंधित है जिसने चार वर्ष पहले अपने पति से तलाक लिया था। अदालत ने यह निर्णय सामाजिक परंपराओं को ध्यान में रखते हुए लिया है, जिसमें पति की मृत्यु के बाद महिला को विधवा का दर्जा देने का प्रावधान है। इस निर्णय के अनुसार, महिला और उसके छह बच्चे अब अपने पिता की संपत्ति के वारिस माने जाएंगे। यह मामला ईसाई समुदाय की एक महिला द्वारा दायर की गई याचिका पर आधारित है, जिसमें उसने बताया कि उसका विवाह 1976 में हुआ था और उनके छह बच्चे हैं। पति ने 2020 में पारिवारिक न्यायालय में तलाक की अर्जी दी थी, जिसे महिला ने विरोध नहीं किया और वह पति से अलग रहने चली गई थी। पारिवारिक न्यायालय ने बिना महिला के पक्ष को सुने ही सितंबर 2022 में तलाक को मंजूरी दे दी थी।
गुजरात उच्च न्यायालय में सुनवाई के दौरान, न्यायाधीश आई जे वोरा और न्यायाधीश आई टी वाच्छानी के समक्ष याचिकाकर्ता ने बताया कि उसके पति का निधन फरवरी 2024 में हो गया। उसने अदालत से अनुरोध किया कि उसे विधवा का दर्जा दिया जाए ताकि वह सामाजिक परंपराओं का निर्वाह कर सके और अपने बच्चों के कानूनी अधिकारों की रक्षा कर सके। अदालत ने पारिवारिक न्यायालय के फैसले को खारिज करते हुए कहा कि समाज में अकेली महिला का जीवन कठिन होता है और उसे सामाजिक परंपरा निभाने का अधिकार है। इस निर्णय ने न केवल महिला के अधिकारों की रक्षा की है, बल्कि उसके बच्चों को भी उनके पिता की संपत्ति का हकदार माना है।









