Guru Purnima Celebration in Jammu: माता-पिता का पूजन और स्नान का महत्व जानें

जागरण संवाददाता, जम्मू: गुरु पूर्णिमा का पर्व सनातन धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यह पर्व आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है,
जागरण संवाददाता, जम्मू: गुरु पूर्णिमा का पर्व सनातन धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यह पर्व आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है, जिसे गुरु पूर्णिमा या व्यास पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन गुरु और शिक्षक के प्रति श्रद्धा और सम्मान प्रकट करने का अवसर मिलता है। गुरु पूर्णिमा का पर्व न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि यह हमारे जीवन में ज्ञान और शिक्षा के महत्व को भी उजागर करता है। इस दिन श्रद्धालु अपने गुरुजनों का पूजन कर उनके आशीर्वाद की प्राप्ति करते हैं, जिससे जीवन में सकारात्मकता और सफलता का संचार होता है।
श्री कैलख ज्योतिष एवं वैदिक संस्थान ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत रोहित शास्त्री ने बताया कि इस वर्ष पूर्णिमा तिथि 28 जुलाई, मंगलवार को सायं 6.19 बजे प्रारंभ होकर 29 जुलाई, बुधवार को रात्रि 8.06 बजे तक रहेगी। इस दिन सूर्योदय व्यापिनी आषाढ़ पूर्णिमा तिथि होने के कारण व्यास पूजा और दिवा एवं रात्रि आषाढ़ पूर्णिमा व्रत इसी दिन किया जाएगा। महर्षि वेदव्यास जी का जन्मोत्सव पूरे देश में श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है, इसलिए इस पर्व को व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता है। इस दिन श्रद्धालु अपने गुरुजनों का पूजन करते हैं और उनके प्रति आभार व्यक्त करते हैं।
महंत रोहित शास्त्री ने कहा कि इस विशेष अवसर पर भगवान श्रीगणेश, भगवान शिव, माता पार्वती, विद्या की अधिष्ठात्री देवी मां शारदा, भगवान श्रीसत्यनारायण, चंद्रदेव और माता-पिता का पूजन अवश्य करना चाहिए। विशेष रूप से भगवान श्रीसत्यनारायण की कथा का श्रवण, पाठ एवं पूजन अत्यंत शुभ और फलदायी माना गया है। यदि गुरुजी के प्रत्यक्ष दर्शन संभव न हों, तो घर पर श्रद्धापूर्वक उनका ध्यान एवं पूजन करना चाहिए। पूर्णिमा तिथि पर पवित्र नदियों एवं सरोवरों में स्नान का विशेष महत्व है। यदि तीर्थ स्नान संभव न हो, तो घर पर स्नान के जल में गंगाजल मिलाकर स्नान करें और जरूरतमंदों को यथाशक्ति दान दें। ऐसा करने से भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है।









