Guru Purnima Message by Sant Premanand: भक्तों को बताया भगवत प्रेम और पवित्र वाणी का महत्व

वृंदावन (मथुरा) में आयोजित गुरु पूर्णिमा महोत्सव के दौरान संत प्रेमानंद ने सोमवार को अपने दीक्षित शिष्यों को प्रवचन देते हुए कहा कि मनुष्य का मुख्य उद्देश्य भगव
वृंदावन (मथुरा) में आयोजित गुरु पूर्णिमा महोत्सव के दौरान संत प्रेमानंद ने सोमवार को अपने दीक्षित शिष्यों को प्रवचन देते हुए कहा कि मनुष्य का मुख्य उद्देश्य भगवत प्रेम प्राप्त करना और भगवत साक्षात्कार करना है। उन्होंने बताया कि सभी दुखों और विकारों से मुक्ति केवल मानव जीवन में संभव है। संत प्रेमानंद ने यह भी कहा कि प्रेमरस की प्राप्ति के लिए हृदय में प्रीति का होना आवश्यक है। यदि हृदय में प्रीति नहीं है, तो भले ही हम मुख से कितनी भी चर्चा करें, उसका कोई लाभ नहीं होगा। प्रेम की अनुभूति तभी होगी जब हम निरंतर अपने ईष्ट का चिंतन करेंगे।
गुरु पूर्णिमा महोत्सव के दौरान यमुना विहार कुंज आश्रम में संत प्रेमानंद ने अपने प्रवचन में वाणी के महत्व पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि वाणी को संभालकर बोलना चाहिए, क्योंकि इससे पाप भी बन सकता है। दूसरों की निंदा करने से न केवल हमें कुछ नहीं मिलता, बल्कि हमारा पुण्य भी नष्ट होता है। संत प्रेमानंद ने कहा कि वृंदावन में हमें केवल प्रियतम की बातें करनी चाहिए। उन्होंने सत्य, मृदु और हितकर वाणी बोलने का महत्व बताया। यदि हमारी वाणी पवित्र है, तो हमारा चित्त भी पवित्र होगा।
संत प्रेमानंद ने अपने शिष्यों को यह भी बताया कि हमें सभी से प्रेम करना चाहिए और प्रेम से बोलना चाहिए, क्योंकि सभी में भगवान विराजमान हैं। उन्होंने चेतन और अचेतन दोनों में राधाकृष्ण की उपस्थिति की बात की। संत प्रेमानंद ने कहा कि हमें स्वार्थ और छल कपट से दूर रहकर निष्कपट व्यवहार करना चाहिए। सोमवार को यमुना पार के यमुना विहार कुंज आश्रम में गुरु पूर्णिमा महोत्सव के अवसर पर संत प्रेमानंद के दर्शन और पूजन के लिए राजस्थान, हिमाचल, असम, महाराष्ट्र और तेलंगाना के दीक्षित शिष्य पहुंचे। वृंदावन में श्री राधा केलिकुंज में भी हजारों शिष्यों ने पादुका पूजन किया।









