Guru Purnima Celebration: संत प्रेमानंद ने भगवत प्राप्ति का दिया संदेश

संवाद सहयोगी, वृंदावन। गुरु पूर्णिमा के अवसर पर संत प्रेमानंद ने एक महत्वपूर्ण संदेश दिया, जिसमें उन्होंने कहा कि मनुष्य जीवन का मुख्य लक्ष्य भगवत प्राप्ति होना
संवाद सहयोगी, वृंदावन। गुरु पूर्णिमा के अवसर पर संत प्रेमानंद ने एक महत्वपूर्ण संदेश दिया, जिसमें उन्होंने कहा कि मनुष्य जीवन का मुख्य लक्ष्य भगवत प्राप्ति होना चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि हमें अपने सभी कार्यों को भगवान के चरणों में समर्पित करते हुए करना चाहिए और शास्त्र विरुद्ध कोई आचारण नहीं करना चाहिए। संत प्रेमानंद के अनुसार, इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए कई साधनों का वर्णन किया गया है, जिनमें सांख्य योग, अष्टांग योग, कर्मयोग, भक्तियोग और प्रेम योग शामिल हैं। लेकिन उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि प्रेमयोग की प्राप्ति केवल कठिन साधनों से नहीं होती, क्योंकि प्रेम एक निर्मल हृदय में ही प्रकट होता है। उन्होंने कहा कि हमें अपने हृदय को निर्मल बनाने के लिए सबसे पहले सद्गुरुदेव की शरण लेनी होगी।
यमुना पार स्थित यमुना विहार कुंज आश्रम में मंगलवार को संत प्रेमानंद ने भक्तों को संबोधित करते हुए कहा कि जब हम सद्गुरुदेव की शरण में जाकर भगवान की भक्ति करेंगे, तो हमारा हृदय निर्मल हो जाएगा और प्रेम प्रकट होगा। उन्होंने भक्ति के नौ प्रकारों का वर्णन किया, जिसमें पहला श्रवण है। उन्होंने कहा कि हमारे कानों को हमेशा भगवत चर्चा सुनने के लिए तत्पर रहना चाहिए, ताकि हमें अन्य बातों में रुचि न रहे। इसके बाद कीर्तन का महत्व बताया, जिसमें उन्होंने कहा कि भगवान के नाम का कीर्तन करने से सभी पाप नष्ट हो जाते हैं। तीसरा प्रकार स्मरण है, जो समस्त भक्ति का फल है। संत प्रेमानंद ने कहा कि हमारी स्मृति में केवल ईष्ट का चिंतन होना चाहिए।
संत प्रेमानंद ने आगे कहा कि चौथा पाद सेवनम है, जिसमें उन्होंने बताया कि जिस घर में ठाकुरजी नहीं होते, वह घर शैतान का घर होता है। उन्होंने यह भी कहा कि हर घर में ठाकुरजी की सेवा और पूजा होनी चाहिए। अर्चनम् में हमें अच्छे पदार्थों से ठाकुरजी की सेवा करनी चाहिए। इसके अलावा, बंधनम् और दास्यम का भी महत्व बताया गया, जिसमें ठाकुरजी की वंदना और प्रणाम करना शामिल है। संत प्रेमानंद ने कहा कि हमें अपने अहंकार का समर्पण करना चाहिए, क्योंकि आत्म समर्पण ही प्रेम की ओर ले जाता है। वृंदावन को प्रिया प्रियतम की भक्ति का केंद्र मानते हुए उन्होंने कहा कि जो प्रिया प्रियतम के दासत्व में रहता है, उसका जीवन श्रेष्ठ होता है। मंगलवार को गुरु पूर्णिमा महोत्सव में बंगाल, उत्तराखंड, तमिलनाडु, गोवा के साथ स्थानीय दीक्षित शिष्यों ने संत प्रेमानंद के दर्शन कर पूजन किया।









