Demand to Halt Demolition of 38 Buildings: जौहर विश्वविद्यालय के 38 भवनों के ध्वस्तीकरण पर रोक लगाने की मांग

पीलीभीत में समाजवादी अल्पसंख्यक सभा के पदाधिकारियों ने रामपुर के जौहर विश्वविद्यालय के 38 भवनों को ध्वस्त करने के आदेश पर तुरंत रोक लगाने की मांग की है। इस संदर
पीलीभीत में समाजवादी अल्पसंख्यक सभा के पदाधिकारियों ने रामपुर के जौहर विश्वविद्यालय के 38 भवनों को ध्वस्त करने के आदेश पर तुरंत रोक लगाने की मांग की है। इस संदर्भ में संगठन के प्रतिनिधिमंडल ने प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल को एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें उन्होंने मामले का निष्पक्ष और विधिसम्मत समाधान करने की अपील की। ज्ञापन में संगठन के जिला अध्यक्ष रियाज खान के नेतृत्व में कहा गया कि जौहर विश्वविद्यालय के भवनों को ध्वस्त करने की प्रस्तावित कार्रवाई से हजारों विद्यार्थियों, शिक्षकों, कर्मचारियों और स्थानीय नागरिकों का भविष्य प्रभावित होगा। ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि किसी भी प्रशासनिक या कानूनी कार्रवाई को संविधान, कानून और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के अनुरूप किया जाना चाहिए। यदि निर्माण नक्शे या भूमि संबंधी कोई विवाद है, तो उसका समाधान वैधानिक प्रक्रिया के तहत किया जाना चाहिए, ताकि छात्रों की शिक्षा बाधित न हो।
ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि जौहर विश्वविद्यालय क्षेत्र के बच्चों को बेहतर शिक्षा उपलब्ध करा रहा है, लेकिन राजनीतिक द्वेष की भावना से उसके भवनों को ध्वस्त करने का प्रयास किया जा रहा है। संगठन का यह भी दावा है कि विश्वविद्यालय के निर्माण के समय ग्राम सींगनखेड़ा न तो पंचायत राज अधिनियम के तहत निर्माण अनुमति की अनिवार्यता वाले क्षेत्र में था और न ही आरबी एक्ट, 1958 के अंतर्गत रेगुलेटेड एरिया में शामिल था। इसके अलावा, ग्राम सींगनखेड़ा को 27 सितंबर 2024 को पहली बार रामपुर विकास प्राधिकरण के क्षेत्र में शामिल किया गया, जबकि विश्वविद्यालय का निर्माण इससे पहले ही पूरा हो चुका था। इस प्रकार, ज्ञापन में कहा गया कि रामपुर विकास प्राधिकरण और जिला प्रशासन की प्रस्तावित कार्रवाई शिक्षा और छात्र हित के विरुद्ध है।









