Heavy Industries as a Remedy for Bengal's Economy: नीति आयोग के उपाध्यक्ष ने सुझाया बड़ा रोडमैप

राज्य ब्यूरो, कोलकाता। पश्चिम बंगाल की आर्थिक चुनौतियों से निपटने के लिए नीति आयोग के उपाध्यक्ष अशोक लाहिड़ी ने एक महत्वपूर्ण सुझाव दिया है। उन्होंने कहा है कि
राज्य ब्यूरो, कोलकाता। पश्चिम बंगाल की आर्थिक चुनौतियों से निपटने के लिए नीति आयोग के उपाध्यक्ष अशोक लाहिड़ी ने एक महत्वपूर्ण सुझाव दिया है। उन्होंने कहा है कि राज्य में भारी उद्योगों की स्थापना, भूमि सुधार और गहरे समुद्री बंदरगाह के निर्माण की आवश्यकता है। सोमवार को कोलकाता में आयोजित 'विकसित भारत' विषयक संगोष्ठी में लाहिड़ी ने यह बात कही। उनका मानना है कि राज्य की वित्तीय स्थिति को मजबूत करने का सबसे प्रभावी उपाय बड़े उद्योगों का विस्तार करना है। उन्होंने यह भी बताया कि भारी उद्योगों के लिए विशाल भूमि की आवश्यकता होती है, लेकिन बंगाल में बड़े भूखंड आसानी से उपलब्ध नहीं हैं। इसलिए, भूमि सीमा कानूनों की समीक्षा कर बड़े भूभाग उपलब्ध कराने पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।
लाहिड़ी ने यह स्पष्ट किया कि बड़े उद्योगों की नींव तभी मजबूत होगी जब पहले सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों (एमएसएमई) को व्यापक समर्थन दिया जाए। उनका कहना है कि राज्य में जल्द से जल्द एक गहरे समुद्री बंदरगाह का निर्माण भी आर्थिक विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि यह बंदरगाह न केवल व्यापार को बढ़ावा देगा, बल्कि राज्य की आर्थिक स्थिति को भी सुदृढ़ करेगा। इसके साथ ही, उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि विभाजन के बाद बंगाल पर पड़े सामाजिक और आर्थिक प्रभावों ने राज्य की प्रगति को गहरा झटका दिया है।
अपने संबोधन में लाहिड़ी ने बंगाल में बसे मारवाड़ी समुदाय की उद्यमशीलता और व्यापारिक दृष्टि की सराहना की। उन्होंने कहा कि विकास की नई यात्रा के लिए निवेश, औद्योगिक विस्तार और उद्यमिता को समान रूप से प्रोत्साहित करना होगा। उनका यह सुझाव राज्य के विकास के लिए एक नई दिशा प्रदान कर सकता है। यदि सरकार इन सुझावों को गंभीरता से लेती है, तो बंगाल की आर्थिक सेहत में सुधार संभव है। लाहिड़ी का यह बयान ऐसे समय में आया है जब राज्य की आर्थिक स्थिति को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। उनके विचारों से यह स्पष्ट होता है कि राज्य में औद्योगिक विकास के लिए एक ठोस योजना की आवश्यकता है।









