Hepatitis C spreads rapidly like HIV: हेपेटाइटिस C की तेजी से फैलने की जानकारी, थकान और आँखों के पीलापन पर ध्यान दें

रामपुर से जागरण संवाददाता की रिपोर्ट के अनुसार, अगर आपको लंबे समय से सिरदर्द, बुखार, उल्टी, भूख में कमी, थकान और त्वचा व आंखों में पीलापन महसूस हो रहा है, तो यह
रामपुर से जागरण संवाददाता की रिपोर्ट के अनुसार, अगर आपको लंबे समय से सिरदर्द, बुखार, उल्टी, भूख में कमी, थकान और त्वचा व आंखों में पीलापन महसूस हो रहा है, तो यह काला पीलिया, जिसे हेपेटाइटिस बी और सी के नाम से जाना जाता है, का संकेत हो सकता है। इस स्थिति में लापरवाही न बरतें और तुरंत चिकित्सक से सलाह लेकर जांच कराएं। जिला अस्पताल में काला पीलिया की जांच और उपचार की सुविधा पूरी तरह से निश्शुल्क उपलब्ध है। यहां एक रुपये के पर्चे पर मरीजों को काला पीलिया का उपचार मिल रहा है। प्रतिदिन यहां 100 से अधिक मरीज हेपेटाइटिस बी और सी के लिए आ रहे हैं, जिनमें से हेपेटाइटिस सी के मरीजों की संख्या अधिक है। अस्पताल में मरीजों के लिए दवा का अलग काउंटर भी बनाया गया है। जिला अस्पताल में दो चिकित्सक नियुक्त किए गए हैं, जो हेपेटाइटिस के मरीजों का उपचार कर रहे हैं। इनमें से एक चिकित्सक डा. राजीव कुमार राजपाल ने बताया कि उनके पास आने वाले मरीजों में हेपेटाइटिस सी के मामले अधिक हैं। वह प्रतिदिन करीब 100 मरीजों का इलाज कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि हेपेटाइटिस बी और सी के लक्षण एक समान होते हैं, लेकिन दोनों की दवा का कोर्स अलग होता है। यह बीमारी एचआईवी की तरह भी फैल सकती है।
जिला अस्पताल की ओपीडी में हेपेटाइटिस बी के मरीजों का इलाज कर रहे डा. राजेश गंगवार ने बताया कि हेपेटाइटिस एक ऐसी स्थिति है जिसमें लिवर में सूजन होती है, जो मुख्य रूप से वायरस ए, बी, सी आदि के कारण होती है। यह संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने पर फैलता है। इसके मुख्य लक्षणों में पीलिया, यानी त्वचा और आंखों का पीला होना, गहरे रंग का पेशाब, और अत्यधिक थकान शामिल हैं। इस बीमारी से बचने के लिए टीकाकरण करवाना, साफ पानी पीना और स्वच्छता का ध्यान रखना आवश्यक है। हालांकि, जिला अस्पताल में पीलिया से पीड़ित बच्चों के इलाज की सुविधा उपलब्ध नहीं है। इस संबंध में जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डा. बीसी सक्सेना ने बताया कि सरकार की ओर से हेपेटाइटिस पीड़ित बच्चों के लिए जिला स्तर पर इलाज की सुविधा नहीं है। ऐसे बच्चों का इलाज मेरठ मेडिकल कालेज में किया जाता है। यदि कोई बच्चा इलाज के लिए यहां लाया जाता है, तो उसे रेफर कर दिया जाता है। इस प्रकार, हेपेटाइटिस के प्रति जागरूकता और समय पर उपचार आवश्यक है ताकि इस गंभीर बीमारी से बचा जा सके।









