Heritage Preservation in Jammu and Kashmir: जामिया मस्जिद और चामुंडा माता मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए 16.36 करोड़ मंजूर

राज्य ब्यूरो, श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर सरकार ने प्रदेश की साझा धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। सरकार ने रामबन जिले के सर
राज्य ब्यूरो, श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर सरकार ने प्रदेश की साझा धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। सरकार ने रामबन जिले के सर्वाधार स्थित श्री चामुंडा माता मंदिर और दक्षिण कश्मीर में शोपियां की ऐतिहासिक जामिया मस्जिद शरीफ के जीर्णोद्धार एवं संरक्षण के लिए कुल 16.36 करोड़ रुपये की मंजूरी दी है। यह निर्णय मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा लिया गया है, जिसे प्रदेश की बहुआयामी सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, जम्मू प्रांत के जिला रामबन के पोंगल परिस्तान क्षेत्र में समुद्रतल से लगभग 14 हजार फुट की ऊंचाई पर स्थित श्री चामुंडा माता मंदिर के संरक्षण और जीर्णोद्धार के लिए 10.31 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं। यह मंदिर अपनी धार्मिक आस्था के साथ-साथ प्राकृतिक सौंदर्य के लिए भी प्रसिद्ध है। स्थानीय लोगों का मानना है कि यह स्थल लंबे समय से शक्ति उपासना का प्रमुख केंद्र रहा है। इतिहासकारों और स्थानीय परंपराओं के अनुसार, सर्वधार क्षेत्र में पहले मुंडासू मेला और सीनाभाटी मेला जैसे धार्मिक आयोजन होते थे, जो समय के साथ विकसित होकर वर्तमान चामुंडा माता यात्रा का स्वरूप ले चुके हैं। वर्ष 2003 से स्थानीय मंदिर विकास समितियों और सामाजिक संगठनों के सहयोग से यात्रा का नियमित आयोजन किया जा रहा है। सरकार का उद्देश्य मंदिर की प्राचीन वास्तुकला, धार्मिक महत्ता और सांस्कृतिक पहचान को सुरक्षित रखते हुए श्रद्धालुओं के लिए बेहतर सुविधाएं विकसित करना है।
दूसरी ओर, शोपियां की ऐतिहासिक जामिया मस्जिद शरीफ के पुनरुद्धार और विरासत संरक्षण के लिए 6.05 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इस राशि का उपयोग मस्जिद की पारंपरिक स्थापत्य शैली को संरक्षित रखने के लिए किया जाएगा, ताकि उसके ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्वरूप को सुरक्षित रखा जा सके। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि आने वाली पीढ़ियां भी इस धरोहर से जुड़ सकें। सरकार का कहना है कि दोनों परियोजनाओं के पूरा होने से जम्मू-कश्मीर की साझा धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने के प्रयासों को नई गति मिलेगी। इसके साथ ही, प्रदेश के ऐतिहासिक धार्मिक स्थलों की पहचान, पारंपरिक स्थापत्य और पर्यटन क्षमता को भी मजबूती मिलेगी। इस प्रकार, यह कदम न केवल धार्मिक स्थलों के संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह स्थानीय संस्कृति और परंपराओं को भी सहेजने में सहायक होगा। सरकार की यह पहल निश्चित रूप से जम्मू-कश्मीर की सांस्कृतिक धरोहर को सुरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।









