High alert in Punjab before Independence Day: स्वतंत्रता दिवस से पहले पंजाब में हाई अलर्ट, आतंकी नेटवर्क की साजिश के मिले इनपुट

चंडीगढ़ से मिली जानकारी के अनुसार, स्वतंत्रता दिवस समारोह के नजदीक आते ही पंजाब में सुरक्षा एजेंसियों ने अपनी सतर्कता को बढ़ा दिया है। खुफिया रिपोर्टों में पाकि
चंडीगढ़ से मिली जानकारी के अनुसार, स्वतंत्रता दिवस समारोह के नजदीक आते ही पंजाब में सुरक्षा एजेंसियों ने अपनी सतर्कता को बढ़ा दिया है। खुफिया रिपोर्टों में पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई और उससे जुड़े आतंकी संगठनों द्वारा राज्य में अशांति फैलाने की साजिश के संकेत मिले हैं। हाल के महीनों में पुलिस थानों और भाजपा कार्यालयों पर हुए हमलों को भी इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। इन खुफिया इनपुट के बाद पंजाब पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था को और कड़ा कर दिया है। पुलिस के आंतरिक आकलन के अनुसार, मई 2025 में हुए ऑपरेशन सिंदूर के बाद आईएसआई ने पंजाब में अपनी रणनीति को और आक्रामक बना दिया है। हाल में पकड़े गए आतंकी मॉड्यूल, तकनीक आधारित जासूसी के मामलों और सीमा पार से बरामद हथियारों तथा मादक पदार्थों की खेप से यह संकेत मिले हैं कि राज्य में आतंक फैलाने के लिए बहुस्तरीय योजना पर काम किया जा रहा है। खुफिया एजेंसियों के अनुसार, स्वतंत्रता दिवस और उससे पहले के दिनों में हमलों की आशंका बढ़ गई है। इसके लिए बब्बर खालसा इंटरनेशनल से जुड़े तत्वों के अलावा जर्मनी, फ्रांस, पुर्तगाल, ब्रिटेन, कनाडा, अमेरिका और मलेशिया जैसे देशों में सक्रिय संगठित आपराधिक नेटवर्क का उपयोग किए जाने की योजना है। इन नेटवर्क के माध्यम से पंजाब में हथियार और विस्फोटक पहुंचाने की कोशिश की जा रही है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, आईएसआई अपने सीधे नेटवर्क के साथ-साथ कथित खालिस्तान समर्थक संगठनों की आड़ लेकर भी हमले करवाने की रणनीति पर काम कर रही है, ताकि उसकी प्रत्यक्ष भूमिका सामने न आए। सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि सीमा पार से भेजे जा रहे हथियारों का स्वरूप भी बदल गया है। आरडीएक्स आधारित विस्फोटक, हैंड ग्रेनेड और अत्याधुनिक हथियारों के अलावा अब रिमोट नियंत्रित विस्फोटक और पेट्रोल बम जैसी सामग्री भी इस्तेमाल की जा सकती है। संभावित निशानों में पुलिस, केंद्रीय सुरक्षा बल, रक्षा प्रतिष्ठानों के साथ आतंकवाद विरोधी अभियानों से जुड़े वर्तमान और सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारी, दक्षिणपंथी दलों के नेता तथा रेलवे और अन्य महत्वपूर्ण ढांचागत संस्थान शामिल हैं। साथ ही भीड़भाड़ वाले स्थानों को भी निशाना बनाए जाने की आशंका जताई गई है।









