High Court's Major Decision After 42 Years: पूर्व यूपी पुलिस कांस्टेबल की सजा घटाई, 35 हजार मुआवजा देने का आदेश

प्रयागराज से विधि संवाददाता की रिपोर्ट के अनुसार, इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 1984 में हत्या की कोशिश के मामले में पूर्व पुलिस कांस्टेबल बक्स उल्लाह की दोषसिद्धि को ब
प्रयागराज से विधि संवाददाता की रिपोर्ट के अनुसार, इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 1984 में हत्या की कोशिश के मामले में पूर्व पुलिस कांस्टेबल बक्स उल्लाह की दोषसिद्धि को बरकरार रखते हुए उसकी सजा में कमी की है। कोर्ट ने उसकी सजा को छह साल से घटाकर चार साल कर दिया है और जुर्माना भी 600 रुपये से बढ़ाकर 40 हजार रुपये कर दिया है। इसके साथ ही, पीड़ित को 35 हजार रुपये मुआवजा देने का आदेश भी दिया गया है। न्यायमूर्ति संतोष राय की एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा कि यह अपील 41 साल से लंबित थी, जिसमें दोषी की कोई गलती नहीं थी और वह अब 60 साल से अधिक उम्र का हो चुका है। कोर्ट ने यह भी कहा कि रिकार्ड पर मौजूद सुबूतों के आधार पर अभियोजन पक्ष का मामला पूरी तरह साबित था, इसलिए धारा 307 के तहत दोषसिद्धि को बरकरार रखा गया, लेकिन आपराधिक अपील को आंशिक रूप से स्वीकार कर लिया गया।
यह अपील पीलीभीत के स्पेशल जज/एडिशनल सेशन जज के 1985 के उस फैसले के खिलाफ की गई थी, जिसमें बक्स उल्लाह को हत्या की कोशिश का दोषी ठहराते हुए छह साल की कठोर कैद और 600 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई थी। अभियुक्त घटना के समय बरेली में पुलिस कांस्टेबल था और आरोप है कि उसने बिना छुट्टी लिए अपने हेडक्वार्टर से निकलकर अपने गृहनगर बीसलपुर आ गया था। 21 अगस्त 1984 को उसने अपने आध्यात्मिक गुरु पर चाकू से हमला किया, यह आरोप लगाते हुए कि गुरु उसे टेप रिकार्डर चोरी के आरोप में बदनाम कर रहे हैं। जब पीड़ित अस्पताल की ओर भागने की कोशिश कर रहा था, तब बक्स उल्लाह ने उसका पीछा किया और उस पर चाकू से कई वार किए।











