Himachal Pradesh Government's School Complex System Revision: हिमाचल प्रदेश सरकार की स्कूल काम्प्लेक्स प्रणाली में संशोधन की तैयारी, 12 सदस्यीय समिति गठित

हिमाचल प्रदेश में सरकारी प्राथमिक विद्यालयों में लागू स्कूल काम्प्लेक्स प्रणाली में संशोधन की प्रक्रिया अब शुरू हो गई है। इस दिशा में एक 12 सदस्यीय उच्चस्तरीय स
हिमाचल प्रदेश में सरकारी प्राथमिक विद्यालयों में लागू स्कूल काम्प्लेक्स प्रणाली में संशोधन की प्रक्रिया अब शुरू हो गई है। इस दिशा में एक 12 सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति का गठन किया गया है, जिसकी अध्यक्षता निदेशक स्कूल शिक्षा आशीष कोहली करेंगे। यह समिति विभिन्न शिक्षक संगठनों से सुझाव लेकर एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार करेगी, जिसे राज्य सरकार को सौंपा जाएगा। इस रिपोर्ट के आधार पर आगे की नीति तय की जाएगी। उल्लेखनीय है कि 25 जुलाई को मुख्यमंत्री और हिमाचल प्रदेश प्राइमरी टीचर फेडरेशन के बीच हुई बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा के बाद समिति के गठन का निर्णय लिया गया। समिति में शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ विभिन्न शिक्षक संगठनों के प्रतिनिधियों को भी शामिल किया गया है, ताकि सभी पक्षों की राय लेकर एक सर्वसम्मत समाधान निकाला जा सके।
समिति की संरचना में शिक्षा विभाग के अतिरिक्त निदेशक बीआर शर्मा, संयुक्त नियंत्रक (वित्त एवं लेखा) और उपनिदेशक स्कूल शिक्षा शांता चौहान (सदस्य सचिव) शामिल हैं। इसके अलावा, हिमाचल प्रदेश न्यू टीचर्स एसोसिएशन, प्राइमरी टीचर फेडरेशन, प्रिंसिपल एसोसिएशन, स्कूल लेक्चरर एसोसिएशन, राजकीय अध्यापक संघ, टीजीटी (साइंस), टीजीटी (आर्ट्स) और सीएंडवी फेडरेशन के प्रतिनिधियों को भी समिति में सदस्य बनाया गया है। यह समिति सभी संबंधित पक्षों की राय को ध्यान में रखते हुए एक संतुलित और प्रभावी समाधान निकालने का प्रयास करेगी।
समिति की पहली बैठक 5 अगस्त को आयोजित की जाएगी, जिसमें स्कूल काम्प्लेक्स प्रणाली के क्रियान्वयन, प्राथमिक विद्यालयों पर इसके प्रभाव, शिक्षकों की व्यावहारिक समस्याओं और संभावित संशोधनों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। इस बैठक में समिति द्वारा की गई सिफारिशों के आधार पर सरकार आगे का निर्णय लेगी। इस बीच, प्राथमिक शिक्षक संघ का क्रमिक अनशन चौथे दिन भी जारी रहा। बुधवार को मंडी जिला अध्यक्ष बाबूराम कौंडल, महासचिव अतुल लखनपाल, मुकेश पवार, चंद्रमणि ठाकुर और विजय कुमार क्रमिक अनशन पर बैठे। यह स्थिति दर्शाती है कि शिक्षक समुदाय अपनी मांगों को लेकर कितनी गंभीर है और वे समाधान की उम्मीद कर रहे हैं।











