Historic HC Ruling: पुरानी पेंशन योजना के दायरे में आएंगे कई कर्मचारी

राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है, जिसमें लंबे समय तक अंशकालिक, अस्थायी या संविदा आधार पर कार्यरत कर
राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है, जिसमें लंबे समय तक अंशकालिक, अस्थायी या संविदा आधार पर कार्यरत कर्मचारियों को राहत प्रदान की गई है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि यदि ये कर्मचारी नियमितीकरण से पहले की अपनी निर्बाध सेवा को जोड़ते हैं, तो उन्हें पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) के दायरे में लाया जा सकता है। यह निर्णय उन कर्मचारियों के लिए एक बड़ी जीत है, जो नियमितीकरण से पहले की अपनी सेवा को पेंशन के लिए मान्यता दिलाने के लिए संघर्ष कर रहे थे। जस्टिस हरप्रीत सिंह बराड़ ने 95 याचिकाओं के समूह का निपटारा करते हुए यह फैसला सुनाया, जिसमें अदालत ने याचिकाओं को दो श्रेणियों में बांटा। पहली श्रेणी में वे कर्मचारी शामिल थे, जिन्हें 1 जनवरी 2006 से पहले अंशकालिक, अस्थायी या संविदा आधार पर नियुक्त किया गया था, लेकिन उनका नियमितीकरण बाद में हुआ। इन कर्मचारियों ने अदालत से मांग की थी कि उनकी नियमितीकरण से पूर्व की सेवा को भी पेंशन के लिए गिना जाए। दूसरी श्रेणी में वे कर्मचारी थे, जिन्होंने हरियाणा सरकार के 8 मई 2023 के कार्यालय ज्ञापन के आधार पर पुरानी पेंशन योजना का लाभ मांगा था। उनका तर्क था कि जिन पदों पर उनकी नियुक्ति हुई, उनके लिए भर्ती प्रक्रिया नई पेंशन योजना लागू होने से पहले शुरू हो चुकी थी, लेकिन प्रशासनिक देरी के कारण उनकी नियुक्ति बाद में हुई।
राज्य सरकार ने इस मामले में पंजाब सिविल सर्विसेज नियमों का हवाला देते हुए तर्क किया कि अंशकालिक सेवा को पेंशन के लिए अर्हकारी सेवा नहीं माना जा सकता। हालांकि, हाई कोर्ट ने इस दलील को खारिज कर दिया। अदालत ने एक याचिकाकर्ता के मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि उसने 15 फरवरी 2002 से अंशकालिक कर्मचारी के रूप में लगातार सेवा दी और 16 मई 2016 तक बिना किसी व्यवधान के कार्य किया। अदालत ने यह भी कहा कि यदि केवल इस आधार पर कि प्रारंभिक नियुक्ति अंशकालिक थी, नियमितीकरण से पहले दी गई मूल्यवान सेवा को पेंशन लाभों के लिए विचार से बाहर रखा जाए, तो यह स्पष्ट अन्याय होगा। इस निर्णय ने उन कर्मचारियों के लिए एक नई उम्मीद जगाई है, जो लंबे समय से अपने अधिकारों के लिए लड़ रहे थे।









