IIT Delhi and AIIMS Develop Hindi Speech Therapy: स्ट्रोक मरीजों के लिए मेलोडिक इंटोनेशन थेरेपी का पहला हिंदी संस्करण

नई दिल्ली से एक महत्वपूर्ण समाचार में, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आइआइटी) दिल्ली ने अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) और इंस्टीट्यूट आफ ह्यूमन बिहेवियर
नई दिल्ली से एक महत्वपूर्ण समाचार में, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आइआइटी) दिल्ली ने अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) और इंस्टीट्यूट आफ ह्यूमन बिहेवियर एंड एलाइड साइंसेज (आइएचबीएएस) के सहयोग से एक नई चिकित्सा पद्धति का विकास किया है। यह पद्धति विशेष रूप से उन स्ट्रोक मरीजों के लिए बनाई गई है, जो बोलने की क्षमता खो चुके हैं। इस चिकित्सा पद्धति का नाम मेलोडिक इंटोनेशन थेरेपी (एमआइटी) है, और यह हिंदी में उपलब्ध है। यह एक संगीत आधारित उपचार विधि है, जो मरीजों को दोबारा बोलने में सहायता करती है। शोधकर्ताओं का मानना है कि इस नई पद्धति से मरीजों को अपनी बोलने की क्षमता पुनः प्राप्त करने में मदद मिलेगी।
शोध के अनुसार, स्ट्रोक के बाद कई मरीज नॉन-फ्लुएंट अफेजिया से ग्रस्त हो जाते हैं, जिसका अर्थ है कि वे भाषा को समझते हैं, लेकिन बोल नहीं पाते। अब तक उपलब्ध अधिकांश चिकित्सा सामग्री अंग्रेजी में थी, जिससे हिंदी भाषी मरीजों को उपचार में कठिनाई होती थी। इस समस्या को ध्यान में रखते हुए, शोधकर्ताओं की टीम ने हिंदी की ध्वनि, लय और उच्चारण के अनुरूप एक विशेष थेरेपी विकसित की है। पायलट अध्ययन में, छह हिंदी भाषी स्ट्रोक मरीजों को 45 से 60 मिनट के 40 सत्र दिए गए, जिसमें सभी मरीजों में चिकित्सकीय रूप से महत्वपूर्ण सुधार देखा गया।
शोधकर्ताओं का कहना है कि इस थेरेपी के परिणाम उत्साहजनक हैं। मरीज पहले की तुलना में लंबे वाक्य बोलने लगे हैं, उनकी बातचीत अधिक सहज हो गई है और उनके जीवन की गुणवत्ता में भी सुधार हुआ है। इस अध्ययन में किसी भी मरीज में थेरेपी का नकारात्मक प्रभाव नहीं पाया गया। आइआइटी दिल्ली के प्रो. राहुल गर्ग ने कहा कि ये प्रारंभिक परिणाम बहुत सकारात्मक हैं, जबकि प्रो. एनएम अनूप कृष्णन ने बताया कि यह अभी एक प्रारंभिक अध्ययन है और भविष्य में बड़े स्तर पर शोध किया जाएगा। इसके अलावा, टीम डिजिटल माध्यम से इस थेरेपी को दूरदराज के मरीजों तक पहुंचाने की योजना बना रही है, ताकि जो मरीज अस्पतालों से दूर हैं, वे भी इस उपचार का लाभ उठा सकें।









