Increasing Tiger Population in Sohilwa: सोहेलवा में बढ़ रहा बाघों का कुनबा, लेपर्ड सफारी से पर्यटन को मिलेगा नया आयाम

सोहेलवा वन्यजीव प्रभाग, जो भारत-नेपाल सीमा पर फैला हुआ है, में बाघों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है। वर्ष 2022-23 में वन कर्मियों द्वारा एक बाघ की पहचान
सोहेलवा वन्यजीव प्रभाग, जो भारत-नेपाल सीमा पर फैला हुआ है, में बाघों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है। वर्ष 2022-23 में वन कर्मियों द्वारा एक बाघ की पहचान की गई थी, जिसके बाद ट्रैकिंग कैमरों की मदद से इसकी संख्या तीन पाई गई। वर्तमान में, इस क्षेत्र में चार बाघ और दो शावक देखे जा रहे हैं, जो सोहेलवा जंगल की प्राकृतिक सुंदरता में जीवन्तता भर रहे हैं। बाघों की वास्तविक संख्या का पता लगाने के लिए 2026 में पुन: गणना का कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा, लेकिन इसके परिणाम अभी तक सामने नहीं आए हैं। सोहेलवा में बाघों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए 150 ट्रैकिंग कैमरे लगाए गए हैं। हालांकि, पर्यावरण प्रेमियों को इस बार टाइगर रिजर्व प्रोजेक्ट के लिए केंद्र सरकार से मंजूरी नहीं मिलने से निराशा का सामना करना पड़ा है।
इसके बावजूद, वन विभाग ने जरवा क्षेत्र में इको-टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाए हैं। इससे न केवल सोहेलवा जंगल की हरियाली और प्राकृतिक सौंदर्य को देखने के लिए पर्यटकों की संख्या में वृद्धि हुई है, बल्कि नेपाल के पहाड़ों का दृश्य भी सैलानियों को आकर्षित कर रहा है। सोहेलवा वन्यजीव प्रभाग में जैव विविधता की अपार संभावनाएं हैं, और इसे राष्ट्रीय उद्यान दुधवा की तर्ज पर विकसित करने की योजना बनाई जा रही है। यहाँ लेपर्ड सफारी का विकास किया जाएगा, जिससे पर्यटकों को वन्यजीवों के साथ-साथ स्थानीय संस्कृति का अनुभव भी हो सकेगा। जंगल के आसपास के गांवों के निवासियों को छोटे-छोटे काटेज बनाने के लिए प्रेरित किया जाएगा, जिससे उन्हें रोजगार के नए अवसर मिलेंगे।









