Increasing Urea Production: यूरिया उत्पादन में आत्मनिर्भर बनने के लिए बढ़ाया जाए उत्पादन

भारत सरकार ने घरेलू यूरिया उत्पादन को बढ़ाने के लिए ठोस कदम उठाने का निर्णय लिया है। रसायन और उर्वरक मामलों की संसद की स्थायी समिति ने हाल ही में लोकसभा में अपन
भारत सरकार ने घरेलू यूरिया उत्पादन को बढ़ाने के लिए ठोस कदम उठाने का निर्णय लिया है। रसायन और उर्वरक मामलों की संसद की स्थायी समिति ने हाल ही में लोकसभा में अपनी रिपोर्ट पेश की, जिसमें सुझाव दिया गया है कि दुर्गापुर, हल्दिया और कोरबा में स्थित यूरिया कारखानों की उत्पादन क्षमता को बढ़ाया जाए। इस कदम का उद्देश्य देश की बढ़ती यूरिया जरूरतों को पूरा करना है और साथ ही आयात पर निर्भरता को कम करना है। समिति ने उल्लेख किया कि वित्त वर्ष 2025-26 में भारत ने 100 लाख टन से अधिक यूरिया का आयात किया, जो कि वैश्विक घटनाक्रमों, विशेषकर यूक्रेन युद्ध के कारण प्रभावित हुआ है। ऐसे में, घरेलू उत्पादन को बढ़ाना न केवल आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह किसानों के लिए भी फायदेमंद होगा।
स्थायी समिति की रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि वर्ष 2024-25 में भारत में 307 लाख टन यूरिया का उत्पादन हुआ, जबकि इसकी खपत 388 लाख टन थी। इससे स्पष्ट होता है कि उत्पादन में वृद्धि की आवश्यकता है। समिति ने भविष्यवाणी की है कि वर्ष 2035-36 तक यूरिया की मांग 444 लाख टन तक पहुंचने की संभावना है। इस मांग को पूरा करने के लिए, नए कारखानों की स्थापना और मौजूदा कारखानों की उत्पादन क्षमता में वृद्धि की सिफारिश की गई है। इससे न केवल किसानों को सस्ती दरों पर उर्वरक उपलब्ध होगा, बल्कि समय पर भी मिलेगा, जिससे कृषि उत्पादन में सुधार होगा।
समिति ने रसायन और उर्वरक मंत्रालय को इस रिपोर्ट के माध्यम से आवश्यक कदम उठाने के लिए निर्देशित किया है। यह रिपोर्ट देश के कृषि क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यदि यह सुझाव लागू होते हैं, तो इससे भारत की उर्वरक उत्पादन क्षमता में वृद्धि होगी और देश को विदेशी बाजारों पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी। यह न केवल किसानों के लिए, बल्कि समग्र कृषि विकास के लिए भी लाभकारी साबित होगा। इस प्रकार, सरकार की यह पहल कृषि क्षेत्र में स्थिरता और विकास को सुनिश्चित करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है।









