Indore Model for Clean Delhi: दिल्ली को स्वच्छ बनाने के लिए लागू होगा इंदौर मॉडल? एलजी ने MCD के एक जोन में पायलट प्रोजेक्ट के दिए निर्देश

नई दिल्ली में स्वच्छता को बढ़ावा देने के लिए उपराज्यपाल टीएस संधू ने इंदौर मॉडल को अपनाने का निर्णय लिया है। उन्होंने दिल्ली नगर निगम (mcd) के एक जोन में इस मॉड
नई दिल्ली में स्वच्छता को बढ़ावा देने के लिए उपराज्यपाल टीएस संधू ने इंदौर मॉडल को अपनाने का निर्णय लिया है। उन्होंने दिल्ली नगर निगम (MCD) के एक जोन में इस मॉडल को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू करने के लिए आवश्यक निर्देश दिए हैं। यह निर्णय निगम की स्वच्छता, प्रदूषण और अन्य संबंधित मुद्दों पर हुई समीक्षा बैठक के दौरान लिया गया। संधू ने निगमायुक्त को जलभराव रोकने, नालों की सफाई, डेंगू और मलेरिया की रोकथाम के उपायों की समीक्षा करने के साथ-साथ पीएम-उदय योजना की प्रगति पर ध्यान देने के लिए कहा। इस बैठक में उन्होंने अधिकारियों को इंदौर नगर निगम के ठोस कचरा प्रबंधन मॉडल का अध्ययन करने और इसे MCD के एक जोन में लागू करने की संभावनाओं पर विचार करने के निर्देश दिए। इंदौर में कचरे का निस्तारण स्रोत पर ही किया जाता है, जिससे लैंडफिल साइटों पर कचरा नहीं पहुंचता है।
बैठक के दौरान, एलजी ने दिल्ली के लैंडफिल साइटों पर पुराने कचरे के निस्तारण की स्थिति पर संतोष व्यक्त किया, लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि नए कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण सुनिश्चित किया जाना चाहिए। इसके लिए उन्होंने एक मजबूत निगरानी व्यवस्था विकसित करने के निर्देश दिए। संधू ने चिंता जताई कि लगभग 50 प्रतिशत कचरे का अभी भी स्रोत पर अलग-अलग नहीं किया जा रहा है, जिससे लैंडफिल साइटों पर कचरे का निस्तारण जारी है। उन्होंने कहा कि यदि इस स्थिति में सुधार नहीं हुआ, तो पुराने कचरे के निस्तारण के प्रयासों का पूरा लाभ नहीं मिल सकेगा।
बैठक में मानसून के दौरान डेंगू और मलेरिया जैसी मच्छर जनित बीमारियों की रोकथाम के उपायों की भी समीक्षा की गई। इसके अलावा, टोल प्लाजा पर यातायात जाम, टोल टैक्स संग्रहण व्यवस्था और पीएम-उदय योजना के क्रियान्वयन की स्थिति पर चर्चा की गई। उन्होंने आगामी सर्दियों को ध्यान में रखते हुए वायु प्रदूषण की रोकथाम के लिए एक व्यापक कार्य योजना तैयार करने के निर्देश दिए। इसके साथ ही, उन्होंने टूटी और क्षतिग्रस्त सड़कों के मरम्मत कार्य में तेजी लाने और एमसीडी के अधीन सभी प्रमुख सड़कों का रोड सेफ्टी ऑडिट कराने का भी निर्देश दिया, ताकि संभावित दुर्घटना स्थलों की पहचान कर समय रहते सुधार किया जा सके।









