Injured Students Speak Out: 'एक आंख की रोशनी गई, नींद भी नहीं आती'

नई दिल्ली। 20 जुलाई को हुए छात्र प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन और लाठीचार्ज में घायल हुए छात्रों ने अपनी दर्दनाक कहानियाँ साझा की हैं। उनका कहना है कि उनके शरीर पर
नई दिल्ली। 20 जुलाई को हुए छात्र प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन और लाठीचार्ज में घायल हुए छात्रों ने अपनी दर्दनाक कहानियाँ साझा की हैं। उनका कहना है कि उनके शरीर पर लगे घाव जिंदगी भर रहेंगे, लेकिन आंदोलन में शामिल होने का उन्हें कोई पछतावा नहीं है। कई छात्र अब भी इलाज करा रहे हैं, जिनमें से कुछ की कई सर्जरी हो चुकी हैं, जबकि कुछ की आंखों की रोशनी लौटने की उम्मीद बेहद कम बताई गई है। इस प्रदर्शन में शामिल छात्रों का कहना है कि वे अपने हक के लिए खड़े हुए थे और इस संघर्ष में जो भी हुआ, वह व्यर्थ नहीं गया। उन्होंने कहा कि उनके माता-पिता ने हमेशा सिखाया है कि हर घटना किसी अच्छे कारण से होती है। 25 वर्षीय इरशाद शेख ने बताया कि उनके चेहरे, गर्दन और शरीर के ऊपरी हिस्से में कई पैलेट लगे थे, जिन्हें निकालने के लिए तीन सर्जरी करनी पड़ी। अब वह खतरे से बाहर हैं, लेकिन आगे के इलाज के लिए मध्य प्रदेश के जबलपुर स्थित अपने घर लौटने की योजना फिलहाल टाल दी है। इरशाद ने कहा कि इतनी गंभीर चोटों के बावजूद उन्हें आंदोलन में शामिल होने का कोई अफसोस नहीं है। उन्होंने तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे का जिक्र करते हुए कहा कि उन्हें लगा कि आंदोलन अपने उद्देश्य में सफल रहा। उनके अनुसार, जो कुछ उनके और अन्य छात्रों के साथ हुआ, वह व्यर्थ नहीं गया और यह उनकी जीत है। 19 वर्षीय साहिल लोछाब की दाहिनी आंख में पैलेट लगा था। उनके पिता दीपक ने बताया कि साहिल का एक और ऑपरेशन होना बाकी है। डॉक्टरों ने कहा है कि उनकी आंख की रोशनी वापस आने की संभावना एक प्रतिशत से भी कम है। परिवार फिलहाल इलाज और उनके स्वस्थ होने की प्रार्थना पर ही ध्यान दे रहा है। 18 वर्षीय पत्रकारिता छात्र विषु ने आरोप लगाया कि वह दोपहर के समय प्रदर्शन स्थल की ओर जा रहे थे, तभी आंसू गैस के गोले छोड़े गए। आंखों में जलन होने पर वह वापस लौटने लगे, तभी चार पुलिसकर्मियों ने उन्हें बिना किसी उकसावे के लाठियों से पीटना शुरू कर दिया। उनका कहना है कि वह शांतिपूर्ण तरीके से जा रहे थे, लेकिन इसके बावजूद उनके साथ मारपीट की गई। एक कथित वीडियो में भी वह बैग लेकर चलते दिखाई देते हैं, जिसके बाद पुलिसकर्मी उन्हें थप्पड़ मारते नजर आते हैं। विषु ने कहा कि इस घटना ने पुलिस पर उनका भरोसा तोड़ दिया है और वह कानूनी कार्रवाई पर विचार कर रहे हैं। 26 वर्षीय लव कुश प्रजापति ने बताया कि वह अभिजीत दिपके के काफिले के साथ चल रहे थे, तभी उन पर लाठीचार्ज हुआ। इस दौरान उनके घुटनों और टखने में फ्रैक्चर हो गया, साथ ही सिर में भी चोट आई। उन्होंने कहा कि घटना के बाद से उन्हें ठीक से नींद नहीं आती और वह उस दिन को जिंदगी भर नहीं भूल पाएंगे। उनका कहना है कि वह केवल यह सुनिश्चित कर रहे थे कि कोई हिंसा न हो, लेकिन इसके बावजूद उन्हें पीटा गया। 20 वर्षीय आहेली भट्टाचार्य ने बताया कि वह अन्य महिलाओं के साथ महिला पुलिसकर्मियों के सामने मानव श्रृंखला बनाकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रही थीं। उन्हें लगा था कि महिला होने और शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन करने के कारण उनके साथ कुछ गलत नहीं होगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग कर रहे शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के साथ पुलिस ने बर्बरता की।









