Insurance Claim Rejected: पुरानी बीमारी बता खारिज किया था मेडिक्लेम, अब चुकाना होगा हर्जाना

धर्मशाला। बीमा कंपनियों द्वारा उपभोक्ताओं के साथ की जाने वाली अनुचित व्यापारिक प्रथाओं के खिलाफ एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। जिला उपभोक्ता आयोग ने एक महिला
धर्मशाला। बीमा कंपनियों द्वारा उपभोक्ताओं के साथ की जाने वाली अनुचित व्यापारिक प्रथाओं के खिलाफ एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। जिला उपभोक्ता आयोग ने एक महिला के मेडिक्लेम दावे को खारिज करने के मामले में बीमा कंपनी को सख्त निर्देश दिए हैं। आयोग ने इसे सेवा में कमी और अनुचित व्यापारिक व्यवहार मानते हुए बीमा कंपनी को 2,30,124 रुपये का दावा नौ फीसदी वार्षिक ब्याज सहित चुकाने का आदेश दिया है। इसके अलावा, आयोग ने उपभोक्ता को मानसिक पीड़ा के लिए 20 हजार रुपये और वाद व्यय के रूप में 15 हजार रुपये का हर्जाना देने के निर्देश भी जारी किए हैं। यह फैसला आयोग के अध्यक्ष हेमांशु मिश्रा, सदस्य आरती सूद और नारायण ठाकुर की अदालत ने सुनाया। इस मामले में शिकायतकर्ता अनीता शर्मा ने पालमपुर के अंतर्गत आईमा से शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया कि वह वर्ष 2019 से लगातार स्वास्थ्य बीमा के दायरे में थीं और वर्ष 2022 में अपनी पुरानी स्वास्थ्य नीति को बिना किसी रुकावट के स्टार हेल्थ से निवा बूपा हेल्थ इंश्योरेंस में पोर्ट करवाया था।
अनीता शर्मा की स्वास्थ्य समस्या जुलाई 2024 में गंभीर हो गई, जिसके कारण उन्हें मोहाली के एक निजी अस्पताल में भर्ती होना पड़ा। अस्पताल में उनके ऑपरेशन पर 2,30,124 रुपये का खर्च आया। जब उन्होंने इस खर्च के लिए मेडिक्लेम का आवेदन किया, तो बीमा कंपनी ने 23 अगस्त 2024 को उनका दावा खारिज कर दिया। कंपनी का तर्क था कि यह बीमारी पहले से मौजूद थी और इस पर 36 माह की प्रतीक्षा अवधि लागू होती है। इस पर आयोग ने मामले से जुड़े सभी दस्तावेजों और तथ्यों की गहन जांच की। आयोग ने कहा कि जब कोई बीमा पॉलिसी बिना किसी अंतराल के पोर्ट की जाती है, तो पुरानी नीति में पूरी की गई वेटिंग अवधि का लाभ उपभोक्ता को अनिवार्य रूप से मिलता है।









