International Tiger Day: आज चित्रकूट से गूंजेगा बाघ संरक्षण का संदेश, जुटेंगे प्रदेश भर के विशेषज्ञ

चित्रकूट में अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस के अवसर पर बुधवार को रानीपुर टाइगर रिजर्व के तत्वावधान में एक महत्वपूर्ण राज्यस्तरीय कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। इस कार्
चित्रकूट में अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस के अवसर पर बुधवार को रानीपुर टाइगर रिजर्व के तत्वावधान में एक महत्वपूर्ण राज्यस्तरीय कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। इस कार्यक्रम का उद्देश्य बाघों के संरक्षण में प्रदेश की उपलब्धियों और भविष्य की रणनीतियों को साझा करना है। जगद्गुरु रामभद्राचार्य दिव्यांग राज्य विश्वविद्यालय में होने वाले इस आयोजन में रानीपुर टाइगर रिजर्व की आधिकारिक वेबसाइट का लोकार्पण, लोगो का अनावरण, वन्यजीव फोटोग्राफी प्रदर्शनी, जनजागरूकता कार्यक्रम और विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाएगा। वन राज्यमंत्री केपी मलिक इस कार्यक्रम का शुभारंभ करेंगे। इस वर्ष की थीम ''आदिवासी लोगों और स्थानीय समुदायों को केंद्र में रखकर बाघों के भविष्य को सुरक्षित करना'' है, जो बाघ संरक्षण में स्थानीय समुदायों की भागीदारी के महत्व को उजागर करती है।
रानीपुर टाइगर रिजर्व को वर्ष 2022 में चौथे टाइगर रिजर्व के रूप में अधिसूचित किया गया था। बाघों के संरक्षण के प्रयासों का प्रभाव इनकी बढ़ती संख्या से स्पष्ट होता है। वर्ष 2018 में प्रदेश में 173 बाघ थे, जो वर्ष 2022 में बढ़कर 205 हो गए हैं। यह वृद्धि बाघों की संख्या के आधार पर प्रदेश को देश में आठवें स्थान पर लाती है। वर्ष 2006 में बाघों की संख्या 109, वर्ष 2010 में 118 और वर्ष 2014 में 117 थी। इस सफलता के पीछे बाघों के प्राकृतिक आवास के बेहतर प्रबंधन, प्रभावी सुरक्षा, घास के मैदानों के विकास और प्राकृतिक शिकार प्रजातियों की संख्या बढ़ाने जैसे प्रयास शामिल हैं।
मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने में ''बाघ मित्र'' कार्यक्रम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। यह पहल वर्ष 2019 में पीलीभीत में शुरू की गई थी, जिसमें स्थानीय ग्रामीणों को प्रशिक्षित कर वन विभाग से जोड़ा गया है। अक्टूबर 2023 में मुख्यमंत्री ने ''बाघ मित्र'' एप भी लांच किया था, जिससे ग्रामीण बाघ या अन्य वन्यजीवों की जानकारी तुरंत फोटो और लोकेशन के साथ विभाग तक पहुंचा सकते हैं। पीलीभीत टाइगर रिजर्व में 120 ''बाघ मित्र'' सक्रिय हैं, जो वन क्षेत्र से सटे गांवों में रहते हैं और किसी भी वन्यजीव की सूचना तुरंत वन विभाग को देते हैं। इस तरह की पहल से समय रहते निगरानी और बचाव की कार्रवाई संभव हो पाती है, जिससे बाघों और अन्य वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित होती है।









