Iran's Strong Stance on US: अमेरिका हमें नही पढ़ाएगा युद्ध और शांति का पाठ...

ईरान ने अमेरिका के प्रति अपने सख्त रुख को एक बार फिर से स्पष्ट किया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि 'युद्ध होगा या शांति, इसका फैसला अमेरि
ईरान ने अमेरिका के प्रति अपने सख्त रुख को एक बार फिर से स्पष्ट किया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि 'युद्ध होगा या शांति, इसका फैसला अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप नहीं करेंगे।' उन्होंने यह भी कहा कि ईरान अपने राष्ट्रीय हितों के अनुसार हर कदम उठाएगा और आवश्यकता पड़ने पर जवाब भी देगा। बघाई ने यह स्पष्ट किया कि बातचीत का रास्ता हमेशा खुला रहेगा, लेकिन ईरान अपने हितों की रक्षा के लिए किसी भी प्रकार की कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगा। उन्होंने कहा, 'हमने कभी अमेरिका को यह तय नहीं करने दिया कि युद्ध होगा या शांति, और आगे भी ऐसा नहीं होने देंगे।' इस्माइल बघाई ने यह भी कहा कि ईरान अपनी सुरक्षा और संप्रभुता को प्राथमिकता देगा और इसी आधार पर निर्णय लेगा कि किस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देनी है।
यूक्रेन-रूस युद्ध पर भी बघाई ने अपनी राय व्यक्त की। उन्होंने कहा कि ईरान का इस संघर्ष से कोई लेना-देना नहीं है और यूक्रेन द्वारा हाल में की गई कार्रवाई संयुक्त राष्ट्र चार्टर के खिलाफ है। उन्होंने इसे गैरकानूनी और खतरनाक कदम बताया और कहा कि इस मामले में यूक्रेन को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। बघाई ने यह भी आरोप लगाया कि हाल के दिनों में कुछ क्षेत्रीय देशों ने अमेरिका के साथ मिलकर ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई और युद्ध अपराधों में सहयोग किया है। उन्होंने कहा कि तेहरान पहले ही इन मामलों पर अपनी आपत्ति दर्ज करा चुका है।
अमेरिका के साथ बातचीत के बारे में बघाई ने स्पष्ट किया कि फिलहाल कोई सीधी बातचीत नहीं चल रही है। उन्होंने बताया कि हाल ही में ईरान और ओमान के बीच कई दौर की बैठकें हुईं, जिनमें स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जहाजों की आवाजाही को सुरक्षित बनाने पर चर्चा की गई। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि यदि क्षेत्रीय हालात को लेकर अमेरिकी पक्ष का कोई संदेश आता है, तो उसे मध्यस्थ देशों के जरिए ईरान तक पहुंचाया जा सकता है। ईरान ने बातचीत के प्रति अपनी सकारात्मकता दिखाई है, लेकिन बघाई ने दोहराया कि कोई भी निर्णय बाहरी दबाव में नहीं लिया जाएगा। ईरान की सुरक्षा, संप्रभुता और राष्ट्रीय हित सबसे ऊपर हैं, और इसी आधार पर तय होगा कि किस मुद्दे पर बातचीत करनी है।









