ISRO's Role in Education Reforms: शिक्षा सुधारों में इसरो की भूमिका

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (isro) ने दशकों से भारत के अंतरिक्ष मिशनों का नेतृत्व किया है, लेकिन इसके योगदान का दायरा केवल अंतरिक्ष तक सीमित नहीं है। इसरो ने
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने दशकों से भारत के अंतरिक्ष मिशनों का नेतृत्व किया है, लेकिन इसके योगदान का दायरा केवल अंतरिक्ष तक सीमित नहीं है। इसरो ने शिक्षा सुधारों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जिसके पीछे कुछ प्रमुख नाम हैं जैसे यश पाल, के. कस्तूरीरंगन और पूर्व इसरो अध्यक्ष एस. सोमनाथ। जब भी भारत में बड़े शिक्षा सुधारों की आवश्यकता महसूस की गई, तब सरकारें इसरो की विशेषज्ञता की ओर रुख करती हैं। हाल ही में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने परीक्षा सुधार टास्क फोर्स की घोषणा की, जिसमें एस. सोमनाथ को तकनीकी घटक का नेतृत्व करने के लिए चुना गया है। यह टास्क फोर्स भारत की परीक्षा प्रणाली को सुरक्षित बनाने के लिए तकनीक का उपयोग करने पर केंद्रित है। यह कदम पिछले कुछ वर्षों में परीक्षा प्रणाली में आए संकटों के मद्देनजर उठाया गया है, जिसमें पेपर लीक की घटनाएं शामिल हैं।
परीक्षा संकट के बाद, सरकार ने इस नई समिति को तकनीकी समाधान के रूप में पेश किया है। नंदन नीलेकणि, जो इस टास्क फोर्स के अध्यक्ष हैं, के साथ एस. सोमनाथ और IIT मद्रास के निदेशक वी. कामाकोटी जैसे विशेषज्ञ भी शामिल हैं। यह समिति परीक्षा सुरक्षा को लेकर बढ़ती चिंताओं का समाधान करने के लिए बनाई गई है। पिछले आठ वर्षों में, देश में 100 से अधिक पेपर लीक की घटनाएं हुई हैं, जिससे सार्वजनिक परीक्षाओं की विश्वसनीयता पर सवाल उठे हैं। NEET परीक्षा के विवाद ने भी इस समस्या को और बढ़ा दिया है। इस समिति का मुख्य उद्देश्य तकनीक के माध्यम से परीक्षाओं को अधिक सुरक्षित बनाना है, हालांकि इसका विस्तृत रोडमैप अभी तक सार्वजनिक नहीं किया गया है।









