Jammu: जगटी में 20,000 विस्थापित कश्मीरी हिंदुओं की क्यों उड़ी नींद?

जागरण संवाददाता, जम्मू। 1990 में कश्मीर में आतंकवाद के कारण कश्मीरी हिंदुओं को अपने घरों को छोड़कर जम्मू आना पड़ा। इस विस्थापन के बाद सरकार ने इन लोगों के लिए न
जागरण संवाददाता, जम्मू। 1990 में कश्मीर में आतंकवाद के कारण कश्मीरी हिंदुओं को अपने घरों को छोड़कर जम्मू आना पड़ा। इस विस्थापन के बाद सरकार ने इन लोगों के लिए नगरोटा के पास जगटी में विस्थापित कालोनियों का निर्माण किया। यहां 2011 में 127 ब्लॉक बनाए गए, जिनमें 4200 क्वार्टरों में लगभग 20,000 विस्थापित लोग रह रहे हैं। लेकिन इन दिनों इन विस्थापितों की नींद उड़ी हुई है क्योंकि लंबे समय से इन क्वार्टरों की उचित मरम्मत नहीं हुई है। इनकी स्थिति दिन-ब-दिन खराब होती जा रही है। अधिकांश क्वार्टरों की छतों से बारिश का पानी लीक होता है, जिससे रात में सो पाना मुश्किल हो रहा है। कई क्वार्टरों की हालत इतनी खराब है कि किसी भी समय सीमेंट का कोई हिस्सा गिर सकता है। बाथरूम की स्थिति भी दयनीय है, जिससे यहां रहने वाले लोगों को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
जगटी के निवासी इस स्थिति के बारे में बार-बार प्रशासन को सूचित कर चुके हैं, लेकिन उनकी समस्याओं पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। कई क्वार्टरों की बाल्कनियों की स्थिति भी खतरनाक है, जिससे लोग डर के साए में जी रहे हैं। पनुन कश्मीर के वरिष्ठ नेता एमके धर ने कहा कि उन्होंने कई बार प्रदर्शन किए हैं और हाल ही में प्रधानमंत्री कार्यालय को ज्ञापन भी सौंपा है, जिसमें मांग की गई है कि इन क्वार्टरों की मरम्मत कराई जाए ताकि विस्थापित लोग सुरक्षित और सुखद जीवन जी सकें। धर ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने इस मामले में ध्यान नहीं दिया, तो वे आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे।
जगटी के निवासी भूषण लाल भट्ट ने कहा कि वे वर्षों से इन क्वार्टरों में रह रहे हैं, लेकिन हमेशा डर के साए में जीते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को इन क्वार्टरों की मरम्मत करानी चाहिए, क्योंकि ये सरकारी संपत्ति हैं। जगटी में सड़कों की स्थिति भी खराब है और पार्क भी खस्ताहाल हैं। रवि रैना ने बताया कि वे कभी कश्मीर में अपने घरों में रहते थे, लेकिन अब उन्हें विस्थापित कालोनियों में रहना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि यहां कोई सुविधाएं नहीं हैं और क्वार्टर भी सुरक्षित नहीं हैं। संजय धर ने कहा कि 1990 में कश्मीरी हिंदुओं को सब कुछ छोड़कर यहां आना पड़ा, लेकिन सरकार ने जो आवास मुहैया कराया है, वह सुरक्षित होना चाहिए। पीने के पानी की समस्या भी यहां के लोगों के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।









