Jantar Mantar Protest: एफआरएस ने खोली प्रदर्शन में शामिल अपराधियों की कुंडली, संगीन जुर्म के आरोपी भी दिखे

दिल्ली पुलिस के फेशियल रिकग्निशन सिस्टम (एफआरएस) ने जंतर-मंतर पर आयोजित सीजेपी के प्रदर्शन के दौरान 2873 आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों की पहचान की है। हालांकि, इस
दिल्ली पुलिस के फेशियल रिकग्निशन सिस्टम (एफआरएस) ने जंतर-मंतर पर आयोजित सीजेपी के प्रदर्शन के दौरान 2873 आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों की पहचान की है। हालांकि, इस प्रणाली की चेहरे पहचानने की क्षमता वर्तमान में केवल 15 से 20 प्रतिशत के बीच है। ऐसे में यह अनुमान लगाया जा रहा है कि एफआरएस ने प्रदर्शन में मौजूद अपराधियों के केवल एक हिस्से की पहचान की होगी। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, एफआरएस की सटीकता कई तकनीकी पहलुओं पर निर्भर करती है, जिसमें कैमरे की गुणवत्ता, रोशनी की स्थिति, चेहरे का कोण और उपयोग में लाए जा रहे सॉफ्टवेयर के एल्गोरिदम की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। दिल्ली पुलिस ने वर्ष 2018 में एक अदालत में स्वीकार किया था कि उस समय इस्तेमाल किए जा रहे फेशियल रिकग्निशन सिस्टम की सटीकता दर लगभग एक प्रतिशत थी। कई बार यह प्रणाली उम्र और लिंग पहचानने में भी गलतियाँ करती थी। हालांकि, समय के साथ इस तकनीक को अपडेट किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि यदि किसी व्यक्ति की पहचान नियंत्रित माहौल में, जैसे एयरपोर्ट या कार्यालय में स्थिर कैमरे के सामने की जाए तो आधुनिक एफआरएस सिस्टम काफी अधिक सटीक परिणाम दे सकते हैं। लेकिन भीड़भाड़ वाले स्थानों, प्रदर्शनों या कम रोशनी वाले क्षेत्रों में सीसीटीवी फुटेज से पहचान करना चुनौतीपूर्ण होता है।
एफआरएस की जांच में यह भी सामने आया कि पहचाने गए 2873 लोगों में से 989 का गंभीर आपराधिक रिकॉर्ड रहा है। इनमें हत्या के मामलों में शामिल 101 आरोपी, हत्या के प्रयास के 62 आरोपी और डकैती व लूट के मामलों में शामिल 284 लोग शामिल हैं। इसके अलावा दुष्कर्म के 61 आरोपी, पॉक्सो एक्ट के छह आरोपी और महिलाओं से छेड़छाड़ के 25 आरोपी भी मिले हैं। जांच में यह भी सामने आया कि महिलाओं के खिलाफ अपराधों में शामिल कुछ आरोपी पहले भी गंभीर मामलों में संलिप्त रहे हैं। दुष्कर्म के मामलों में शामिल आठ आरोपी ऐसे थे, जिनके खिलाफ दो या उससे अधिक मामले दर्ज हैं। इसके अतिरिक्त, हथियार अधिनियम के तहत अपराधों में शामिल 229, झपटमारी के 135, अपहरण के 19 और एनडीपीएस एक्ट से जुड़े 67 आरोपी भी एफआरएस के जरिए चिन्हित किए गए। हत्या के मामलों में शामिल आरोपियों में 142 ऐसे मिले जिनकी दो या उससे अधिक मामलों में संलिप्तता रही, जबकि 12 आरोपी ऐसे थे जिनके खिलाफ 10 या उससे अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं। लूट और डकैती के मामलों में भी कई पुराने अपराधी सामने आए। इनमें 155 आरोपी ऐसे थे जो दो या उससे अधिक मामलों में शामिल रहे, जबकि 31 आरोपियों के खिलाफ 10 या उससे अधिक मामले दर्ज थे। एनडीपीएस मामलों में भी नौ आरोपी ऐसे मिले, जिनकी दो या उससे अधिक आपराधिक मामलों में संलिप्तता रही।









