Japan's PR rules become stricter: आवेदक की वार्षिक आय से जुड़ा बड़ा नियम, एक अगस्त से होंगे प्रभावी

जापान में स्थायी निवास (पीआर) प्राप्त करना अब भारतीय पेशेवरों के लिए पहले से कहीं अधिक चुनौतीपूर्ण हो गया है। जापानी सरकार ने पीआर के लिए नए दिशा-निर्देश जारी क
जापान में स्थायी निवास (पीआर) प्राप्त करना अब भारतीय पेशेवरों के लिए पहले से कहीं अधिक चुनौतीपूर्ण हो गया है। जापानी सरकार ने पीआर के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं, जो 1 अगस्त से लागू होंगे। इन नए नियमों के अनुसार, आवेदक की वार्षिक आय जापानी नागरिकों की औसत घरेलू आय से अधिक होनी चाहिए। यह कदम सरकार द्वारा उठाया गया है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि स्थायी निवास प्राप्त करने वाला व्यक्ति भविष्य में सार्वजनिक सहायता पर निर्भर न रहे। इसके अलावा, पेंशन प्रणाली को भी सख्त किया गया है। आवेदक को जापान की कर्मचारी पेंशन बीमा प्रणाली में 30 वर्षों के योगदान के बराबर अनुमानित पेंशन लाभ दिखाना होगा। यदि आवेदक ऐसा नहीं कर पाता है, तो उसे अपनी आर्थिक स्थिति को साबित करने के लिए पर्याप्त निजी बचत या निवेश प्रस्तुत करना होगा। इसके साथ ही, जापानी भाषा की दक्षता और स्थानीय सामाजिक नियमों की समझ का मूल्यांकन भी किया जाएगा। बच्चों का नियमित विद्यालय में नामांकन भी अनिवार्य होगा।
नए नियमों के तहत, यदि आवेदक कर, पेंशन या स्वास्थ्य बीमा भुगतान में एक भी देरी करता है, तो उसका पीआर आवेदन खारिज किया जा सकता है। इन सभी रिकॉर्ड की निगरानी जापान की माई नंबर डिजिटल पहचान प्रणाली द्वारा की जाएगी। सामान्य श्रेणी के विदेशी नागरिकों के लिए अब पीआर आवेदन करने से पहले पांच वर्ष की निवास वीजा अवधि पूरी करना आवश्यक होगा, जबकि पहले यह अवधि तीन वर्ष थी। इस नई नीति का उद्देश्य जापान में स्थायी निवास की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और जिम्मेदार बनाना है। इसके साथ ही, सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि जो लोग जापान में स्थायी निवास प्राप्त करें, वे देश की आर्थिक और सामाजिक प्रणाली में सकारात्मक योगदान दे सकें।









