Jawhar University Controversy: हाईकोर्ट से सड़कों तक संग्राम, ध्वस्तीकरण के खिलाफ सपा-कांग्रेस का मिला साथ

रामपुर में जौहर विश्वविद्यालय के 38 अवैध भवनों के ध्वस्तीकरण के आदेश को लेकर स्थिति काफी तनावपूर्ण बनी हुई है। रामपुर विकास प्राधिकरण द्वारा जारी ध्वस्तीकरण आदे
रामपुर में जौहर विश्वविद्यालय के 38 अवैध भवनों के ध्वस्तीकरण के आदेश को लेकर स्थिति काफी तनावपूर्ण बनी हुई है। रामपुर विकास प्राधिकरण द्वारा जारी ध्वस्तीकरण आदेश के खिलाफ विश्वविद्यालय प्रबंधन ने मंडलायुक्त से राहत प्राप्त की है, जिससे प्रबंधन को कुछ समय के लिए राहत मिली है। इस संकट से निपटने के लिए विश्वविद्यालय प्रबंधन ने अपीलीय न्यायालय में जाने का निर्णय लिया है। 15 जुलाई से शुरू हुए इस विवाद ने विश्वविद्यालय के छात्रों और प्रबंधन को एकजुट कर दिया है। विश्वविद्यालय प्रबंधन अब आम जनता का समर्थन जुटाने में जुटा हुआ है, ताकि न्यायालयों पर नैतिक दबाव बनाया जा सके। छात्रों ने विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार पर धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया है, जिसमें वे बारिश में भी डटे हुए हैं। इस प्रदर्शन के माध्यम से वे अपने अधिकारों की रक्षा के लिए आवाज उठा रहे हैं। इसके साथ ही, विश्वविद्यालय प्रबंधन ने राजनीतिक समर्थन भी हासिल करने की कोशिश की है। सपा के नेताओं ने छात्रों के साथ मिलकर जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि राजनीतिक दल भी इस मुद्दे को अपने लाभ के लिए भुनाने में लगे हुए हैं।
कांग्रेस पार्टी भी इस मुद्दे पर सक्रिय है। हाल ही में कांग्रेस नेता कुंवर दानिश अली ने जौहर विश्वविद्यालय का दौरा किया और आजम खां की पत्नी डा. तजीन फात्मा से मुलाकात की। इसके बाद कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय भी विश्वविद्यालय पहुंचे। इस प्रकार, विश्वविद्यालय प्रबंधन ने शासन और प्रशासन पर राजनीतिक और सामाजिक दबाव बनाने की रणनीति तैयार की है। इसके साथ ही, विश्वविद्यालय प्रबंधन ने कानूनी लड़ाई में भी पीछे नहीं हटने का निर्णय लिया है। उच्च न्यायालय में जाने का निर्णय लेने के पीछे का कारण यह है कि यदि मंडलायुक्त के न्यायालय से फैसला उनके पक्ष में नहीं आता है, तो वे उच्च न्यायालय में अपनी याचिका को प्राथमिकता से पेश कर सकें।









