Kapil Sibal challenges anti-defection law: कपिल सिब्बल ने दल-बदल विरोधी कानून को दी चुनौती, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को नोटिस भेजकर मांगा जवाब

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को संविधान की 10वीं अनुसूची की व्याख्या को चुनौती देने वाली कपिल सिब्बल की याचिका पर केंद्र से जवाब मांगा है। इ
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को संविधान की 10वीं अनुसूची की व्याख्या को चुनौती देने वाली कपिल सिब्बल की याचिका पर केंद्र से जवाब मांगा है। इस अनुसूची के तहत किसी राजनीतिक दल में विलय का रास्ता अपनाकर विधायक दलबदल कानून के तहत अयोग्यता से बच जाते हैं। वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने स्वयं इस याचिका को दायर किया है, जिसमें उन्होंने कहा कि यह मुद्दा न केवल कानूनी बल्कि राजनीतिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है। जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच ने इस मामले में केंद्र को नोटिस जारी किया है। नोटिस में यह भी कहा गया है कि इस मामले में उठाए गए कई मुद्दों पर संसद को विचार करने की आवश्यकता हो सकती है। सिब्बल ने दलील दी है कि इस व्याख्या के कारण राजनीतिक संतुलन बिगड़ सकता है, जिससे अल्पसंख्यक पार्टी बहुमत वाली पार्टी बन सकती है या इसके विपरीत।
बेंच ने यह स्पष्ट किया कि दसवीं अनुसूची, जो विधायकों के दल-बदल को नियंत्रित करती है, संसद द्वारा बनाई गई थी और इसके लिए सही प्रक्रिया तय करना विधायिका का कार्य है। सिब्बल ने कोर्ट को यह भी बताया कि गोवा में विधायकों के दल-बदल से संबंधित एक मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। इसके बाद बेंच ने सिब्बल की याचिका को गोवा वाले मामले के साथ जोड़ दिया। याचिका में इस बात पर स्पष्टता मांगी गई है कि क्या मौजूदा व्याख्या के तहत विलय के प्रावधान से संसद और राज्य विधानसभाओं के गठन में बदलाव की अनुमति है, बिना इसके कि एंटी-डिफेक्शन कानून के तहत अयोग्यता लागू हो। सिब्बल ने 22 जुलाई को अपनी याचिका पर तुरंत सुनवाई की मांग की थी।









