Kavad Mela: कांवड़ मेले के दौरान 18 स्कूलों में छुट्टी का आदेश

ऋषिकेश में कांवड़ मेले के दौरान श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए पौड़ी जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया ने 18 शिक्षण संस्थानों में छुट्टी की घोषणा की है। य
ऋषिकेश में कांवड़ मेले के दौरान श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए पौड़ी जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया ने 18 शिक्षण संस्थानों में छुट्टी की घोषणा की है। यह निर्णय विद्यार्थियों की सुरक्षा, यातायात के सुचारु संचालन और किसी भी संभावित असुविधा से बचाव के लिए लिया गया है। जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को आदेश का प्रभावी अनुपालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। कांवड़ मेले के दौरान यात्रा मार्ग पर श्रद्धालुओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि होती है, जिससे स्कूलों में छुट्टी की आवश्यकता महसूस हुई।
छुट्टी की अवधि 30 जुलाई से 11 अगस्त, 2026 तक चार विद्यालयों के लिए निर्धारित की गई है। इन विद्यालयों में राजकीय प्राथमिक विद्यालय, नीलकंठ, राजकीय इंटर कॉलेज, नीलकंठ, राजकीय प्राथमिक विद्यालय, दिउली और राजकीय इंटर कॉलेज, दिउली शामिल हैं। इसके अलावा, 5 अगस्त से 11 अगस्त, 2026 तक 14 शिक्षण संस्थानों में भी छुट्टी रहेगी। इन संस्थानों में सरस्वती शिशु मंदिर, नीलकंठ मल्ली तलाई, राजकीय प्राथमिक विद्यालय, भौन, बाल मैत्री शिशु संस्थान, मलेलगांव, राजकीय प्राथमिक विद्यालय, रत्तापानी, राजकीय प्राथमिक विद्यालय, घट्टूगाड़, राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, घट्टूगाड़, राजकीय प्राथमिक विद्यालय, लक्ष्मणझूला, राजकीय इंटर कॉलेज, लक्ष्मणझूला, गंगा वैली पब्लिक स्कूल, लक्ष्मणझूला, बाल विद्या निकेतन, स्वर्गाश्रम, गीता बाल विद्यालय, स्वर्गाश्रम, एसडीएसए महाविद्यालय, स्वर्गाश्रम और राजकीय प्राथमिक विद्यालय, गंगाभोगपुर शामिल हैं।
यह निर्णय कांवड़ मेले के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा को प्राथमिकता देने के लिए लिया गया है। जिलाधिकारी ने कहा कि यह कदम विद्यार्थियों की सुरक्षा के साथ-साथ यातायात के सुचारु संचालन को सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक था। कांवड़ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की संख्या में वृद्धि के कारण यातायात में भी भारी दबाव पड़ता है, जिससे विद्यार्थियों की सुरक्षा को खतरा हो सकता है। इस प्रकार, यह निर्णय न केवल विद्यार्थियों की सुरक्षा के लिए बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण है। कांवड़ मेले के दौरान श्रद्धालुओं की बढ़ती आवाजाही को देखते हुए यह कदम उठाया गया है, जिससे सभी संबंधित पक्षों को सुरक्षा और सुविधा सुनिश्चित की जा सके।









