Kurukshetra University Achievements: केयू के 11 विद्यार्थियों ने शोध के साथ बीएससी कंप्यूटर साइंस की पढ़ाई पूरी की

कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के इंस्टीट्यूट ऑफ इंटीग्रेटेड एंड ऑनर्स स्टडीज (आईआईएचएस) के 11 विद्यार्थियों ने हाल ही में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत बीएससी क
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के इंस्टीट्यूट ऑफ इंटीग्रेटेड एंड ऑनर्स स्टडीज (आईआईएचएस) के 11 विद्यार्थियों ने हाल ही में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत बीएससी कंप्यूटर साइंस (ऑनर्स विद रिसर्च) की पढ़ाई सफलतापूर्वक पूरी की। इन विद्यार्थियों ने अपने शोध प्रबंध की मौखिक परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया, जिसमें बाह्य परीक्षक प्रो. चंद्रकांत ने उनके शोध कार्य का मूल्यांकन किया। प्रो. चंद्रकांत ने विद्यार्थियों के शोध एवं नवाचार आधारित कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार की शिक्षा वैज्ञानिक दृष्टिकोण, अनुसंधान क्षमता और तकनीकी दक्षता को विकसित करने में सहायक होती है। उन्होंने विद्यार्थियों को उनके प्रयासों के लिए बधाई दी और भविष्य में और अधिक शोध कार्य करने के लिए प्रेरित किया।
इस विशेष कार्यक्रम में 11 विद्यार्थियों में से छह ने प्रो. अश्वनी कुश के निर्देशन में अपने शोध प्रबंध पूरे किए, जबकि पांच विद्यार्थियों ने डॉ. संजीव ग्रेवाल के मार्गदर्शन में अपने शोध कार्य को सफलतापूर्वक संपन्न किया। यह विश्वविद्यालय के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, जो न केवल विद्यार्थियों की मेहनत को दर्शाता है, बल्कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत शोध आधारित स्नातक शिक्षा के प्रभावी क्रियान्वयन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी है। इस कार्यक्रम के तहत विद्यार्थियों को न केवल सैद्धांतिक ज्ञान दिया गया, बल्कि उन्हें व्यावहारिक अनुभव भी प्रदान किया गया, जिससे उनकी तकनीकी क्षमताओं में वृद्धि हुई।
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय ने इस उपलब्धि को गर्व के साथ प्रस्तुत किया है और इसे शिक्षा के क्षेत्र में एक नई दिशा के रूप में देखा जा रहा है। विश्वविद्यालय का मानना है कि इस प्रकार के कार्यक्रम विद्यार्थियों को न केवल उनकी अकादमिक क्षमताओं को बढ़ाने में मदद करते हैं, बल्कि उन्हें भविष्य में अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में भी आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं। इस सफलता के साथ, विश्वविद्यालय ने अपने शैक्षणिक मानकों को और ऊँचा उठाने का संकल्प लिया है, जिससे आने वाले समय में और भी विद्यार्थियों को इस प्रकार के शोध कार्यों में संलग्न किया जा सके।









