Learning from UPSC: NTA को पेपर लीक रोकने के लिए सख्त सुझाव

बरेली में आयोजित एक विमर्श के दौरान परीक्षा प्रणाली में सुधार और पेपर लीक जैसी गंभीर समस्याओं पर चर्चा की गई। इस कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में बरेली कॉले
बरेली में आयोजित एक विमर्श के दौरान परीक्षा प्रणाली में सुधार और पेपर लीक जैसी गंभीर समस्याओं पर चर्चा की गई। इस कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में बरेली कॉलेज के पूर्व प्राचार्य और लोक सेवा आयोग के पूर्व सदस्य प्रो. सोमेश यादव ने अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि परीक्षा की शुचिता को बनाए रखने के लिए केवल कानूनों को कड़ा करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक मजबूत इच्छाशक्ति का होना भी आवश्यक है। उन्होंने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) की भूमिका पर भी सवाल उठाए और सुझाव दिया कि एनटीए को संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) के कार्य करने के तरीके से सीखना चाहिए। यूपीएससी लाखों अभ्यर्थियों की परीक्षा आयोजित करने के बावजूद अपनी पारदर्शिता और विश्वसनीयता बनाए रखने में सक्षम है।
प्रो. यादव ने 2013 से 2024 तक के परीक्षा इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि सिस्टम में मौजूद दोषों को जड़ से खत्म करना अनिवार्य है। उन्होंने पेपर सेट करने वालों की पृष्ठभूमि की जांच करने और डिजिटल युग की चुनौतियों को देखते हुए एक मजबूत डिफेंस सिस्टम बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उनका मानना है कि हैकर्स से प्रश्नपत्रों को सुरक्षित रखने के लिए तकनीकी सुरक्षा को अभेद्य बनाना होगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पेपर खरीदने और बेचने वाले दोनों ही समान रूप से दोषी हैं और उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की आवश्यकता है। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर उन्होंने कहा कि नैतिकता के आधार पर इस्तीफा एक सकारात्मक कदम हो सकता है, लेकिन जब तक सिस्टम के मूलभूत ढांचे में सुधार नहीं होगा, तब तक किसी बड़े बदलाव की उम्मीद करना बेमानी है।









