Legal Support for Protesters: सीजेपी ने प्रदर्शनकारियों के लिए कानूनी सहायता का किया ऐलान

जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने आज प्रदर्शनकारियों और आयोजकों पर दर्ज आपराधिक मामलों को वापस लेने के लिए एक महत्वपूर्ण योजना की घोषणा
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने आज प्रदर्शनकारियों और आयोजकों पर दर्ज आपराधिक मामलों को वापस लेने के लिए एक महत्वपूर्ण योजना की घोषणा की है। पार्टी ने स्पष्ट किया है कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया, तो वे सड़कों पर उतरकर फिर से आंदोलन शुरू करने के लिए तैयार हैं। सीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका ने कहा कि जंतर-मंतर पर 36 दिनों तक चले धरने के दौरान सरकार के साथ तीसरे दौर की बातचीत में इस मुद्दे पर गहन चर्चा हुई थी। इस बातचीत में यह सहमति बनी थी कि देशभर में प्रदर्शनकारियों और आयोजकों के खिलाफ दर्ज सभी एफआईआर वापस लिए जाएंगे। इसके साथ ही, भविष्य में किसी भी आयोजक या प्रदर्शनकारी पर नया मामला दर्ज नहीं किया जाएगा।
सीजेपी ने केंद्रीय मंत्रियों जेपी नड्डा और जीतेंद्र सिंह को एक ड्राफ्ट समझौता सौंपा था, जिसमें इस बात की पुष्टि की गई थी कि सरकार मंगलवार तक लिखित समझौता साझा करेगी। रांका ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि केंद्रीय कैबिनेट मंत्री अपने वादे का सम्मान करेंगे और किसी भी प्रदर्शनकारी को प्रताड़ित नहीं किया जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मंगलवार तक लिखित समझौता नहीं मिलता और गिरफ्तार लोगों को रिहा नहीं किया जाता, तो पार्टी फिर से आंदोलन की राह अपनाएगी। इस युवा आंदोलन को कानूनी झमेलों से बचाने के लिए वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल से सलाह ली जा रही है।
कपिल सिब्बल ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि उन्होंने सीजेपी के छात्रों को कानूनी सहायता देने का निर्णय लिया है। जहां-जहां छात्रों के खिलाफ मामले दर्ज होंगे, वहां उन्हें कानूनी मदद उपलब्ध कराई जाएगी। इसके लिए एक कानूनी वेबसाइट भी बनाई जाएगी और उन्होंने इस उद्देश्य के लिए एक करोड़ रुपये देने की घोषणा की है। सिब्बल ने अन्य लोगों से भी इस कार्य के लिए आर्थिक सहयोग की अपील की है। उन्होंने यह भी आशंका जताई कि दिल्ली पुलिस चेहरे की पहचान तकनीक का उपयोग कर प्रदर्शनकारियों की पहचान कर सकती है। इसके अलावा, उन्होंने चेतावनी दी कि पूरे मामले में सांप्रदायिक रंग जोड़ने की कोशिश की जा सकती है। उन्होंने समाज के सभी वर्गों से अपील की कि वे सुनिश्चित करें कि आंदोलन में शामिल छात्रों को किसी भी तरह से प्रताड़ित या लक्षित न किया जाए।









