Expressway Issues: लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे में गड्ढे, गुणवत्ता व सुपरविजन की कमी से सड़क ने 14 दिन में दिया धोखा

लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे, जो रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के ड्रीम प्रोजेक्ट के रूप में उद्घाटन किया गया था, अब अपने उद्घाटन के केवल 14 दिन बाद ही गड्ढों की समस्या स
लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे, जो रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के ड्रीम प्रोजेक्ट के रूप में उद्घाटन किया गया था, अब अपने उद्घाटन के केवल 14 दिन बाद ही गड्ढों की समस्या से जूझ रहा है। इस सड़क पर मरम्मत के बाद वाहनों का संचालन फिर से शुरू कर दिया गया है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति गुणवत्ता और सुपरविजन की कमी के कारण उत्पन्न हुई है। सड़क निर्माण में यदि गुणवत्ता का ध्यान नहीं रखा जाता है, तो यह समस्या सामान्य हो जाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि लोएस्ट बिडिंग के कारण कंपनियां प्रोजेक्ट तो हासिल कर लेती हैं, लेकिन इसके बाद कास्ट कटिंग के चलते गुणवत्ता में कमी आती है। कम पैकेज वाले इंजीनियरों को नियुक्त किया जाता है, जो महत्वपूर्ण कार्यों को नजरअंदाज करते हैं, जिससे आगे चलकर समस्याएं उत्पन्न होती हैं।
लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआइ) ने पीएनसी कंपनी को 4200 करोड़ रुपये में टेंडर दिया था। लेकिन कंपनी ने निर्माण कार्य के दौरान कई महत्वपूर्ण पहलुओं की अनदेखी की, जैसे अर्थ वर्क, कंपैक्टर से मिट्टी को कूटना और ड्रेनेज सिस्टम। उन्नाव के करोरी के पास धंसी सड़क इसका एक प्रमुख उदाहरण है। एनएचएआइ ने इस एक्सप्रेसवे के निर्माण में आटोमेटेड इंटेलिजेंस मशीन गाइडेड कंस्ट्रक्शन (एआइएमजीसी) तकनीक का उपयोग किया था, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि यह तकनीक केवल सड़क को समतल करने और गुणवत्ता बनाए रखने के लिए है। यदि मिट्टी की परतें ठीक से कम्पैक्ट नहीं की गईं, तो सड़क का धंसना निश्चित है।
सेवानिवृत्त अधीक्षण अभियंता एन. राम का मानना है कि सड़क की आयु बढ़ाने के लिए अर्थ वर्क पर ध्यान देना आवश्यक है। मिट्टी पर हर 25 से 30 सेंटीमीटर पर कम्पैक्टर चलाना चाहिए। इसके अलावा, बरसाती पानी को सड़क पर जमा नहीं होने देना चाहिए, क्योंकि यह सड़क का दुश्मन है। सेवानिवृत्त महाप्रबंधक संदीप गुप्ता ने भी गुणवत्ता और सुपरविजन पर जोर दिया है। उनका कहना है कि प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए कम पैसे वाले पेटी कंट्रैक्टर और इंजीनियरों को नियुक्त किया जाता है, जिससे कार्य की गुणवत्ता प्रभावित होती है। एक्सप्रेसवे पर इन कमियों के कारण सड़क, फ्लाइओवर और राष्ट्रीय राजमार्गों की स्थिति गंभीर हो गई है।









