Magic and Witchcraft in the West: अमेरिका और इंग्लैंड में जादू-टोना का इतिहास

अमेरिका, इंग्लैंड और अन्य पश्चिमी देशों में जादू-टोना का एक गहरा इतिहास रहा है। इंग्लैंड में 16वीं और 17वीं शताब्दी के दौरान, जादू-टोने पर इतना विश्वास था कि वह
अमेरिका, इंग्लैंड और अन्य पश्चिमी देशों में जादू-टोना का एक गहरा इतिहास रहा है। इंग्लैंड में 16वीं और 17वीं शताब्दी के दौरान, जादू-टोने पर इतना विश्वास था कि वहां के शासकों ने तंत्र-मंत्र करने वालों के खिलाफ सख्त कानून बनाए। 1450 से 1750 के बीच, यूरोप में जादू-टोने के खिलाफ चलाए गए अभियानों ने लगभग 100,000 लोगों को प्रभावित किया, जिनमें से अधिकांश महिलाएं थीं। इन अभियानों के परिणामस्वरूप कई लोगों को जादूगरी के आरोप में मौत की सजा दी गई। इंग्लैंड के राजा जेम्स ने भी जादू-टोने पर एक किताब लिखी थी, जो उनके इस विषय में गहरे रुचि को दर्शाती है। जादू-टोने के मामलों में सबसे चर्चित घटना ग्लॉसेस्टर की डचेस एलेनोर कोभम का मामला था, जिसमें उन्हें जादू-टोने के आरोप में दोषी ठहराया गया और उन्हें फांसी दी गई। इस प्रकार, इंग्लैंड में जादू-टोने का प्रभाव लंबे समय तक बना रहा।
15वीं से 18वीं शताब्दी के बीच, जादू-टोने और तंत्र-मंत्र के प्रति लोगों का विश्वास इतना गहरा था कि हजारों निर्दोष लोगों को इसके शक में मौत के घाट उतार दिया गया। जेम्स ने अपनी मां की मृत्यु के पीछे भी तंत्र-मंत्र का हाथ बताया था। इस दौरान, जादू-टोने के मामलों में राजद्रोह, विधर्म और हत्या के मुकदमे भी चलाए गए। आज भी, इंग्लैंड और अन्य यूरोपीय देशों में कभी-कभी जादू-टोने के कारण जघन्य अपराधों के मामले सामने आते हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि अंधविश्वास की जड़ें अब भी गहरी हैं।
अमेरिका में भी जादू-टोने का प्रभाव देखा गया है, विशेषकर सैंटेरिया नामक पंथ के माध्यम से, जो जादू-टोने पर आधारित है। यह परंपरा अफ्रीका से शुरू होकर क्यूबा और फिर लैटिन अमेरिका में फैली। सैंटेरिया में देवी-देवताओं को ओरिशा कहा जाता है, और अनुयायी मानते हैं कि ये शक्तियां उनके जीवन में सकारात्मक प्रभाव डालती हैं। इसके अलावा, वुडू का भी जादू-टोने से जुड़ा एक अंधविश्वास है, जिसमें पुतले के माध्यम से जादू किया जाता है। इस प्रकार, अमेरिका और यूरोप में जादू-टोने का अंधविश्वास गहराई तक फैला हुआ है और आज भी इसके मामले सामने आते रहते हैं।











