Delhi: मालवीय नगर अग्निकांड में प्रशासनिक लापरवाही के गंभीर आरोप

मालवीय नगर स्थित फ्लोरिश स्टे होटल में हुई अग्निकांड की मजिस्ट्रियल जांच रिपोर्ट ने प्रशासनिक लापरवाही और हादसे के बाद तथ्यों को छिपाने के प्रयासों को उजागर किय
मालवीय नगर स्थित फ्लोरिश स्टे होटल में हुई अग्निकांड की मजिस्ट्रियल जांच रिपोर्ट ने प्रशासनिक लापरवाही और हादसे के बाद तथ्यों को छिपाने के प्रयासों को उजागर किया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि नगर निगम (एमसीडी) के कुछ इंजीनियरों और दिल्ली पुलिस के अधिकारियों ने जांच के दौरान ऐसे जवाब दिए, जो सरकारी रिकॉर्ड से मेल नहीं खाते। इससे यह स्पष्ट होता है कि जांच को गुमराह करने का प्रयास किया गया और संबंधित अधिकारियों ने अपनी जिम्मेदारी से बचने की कोशिश की। रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि दक्षिणी जोन के सहायक अभियंता सुनील चौहान और कनिष्ठ अभियंता आशीष कुमार राय ने अपने लिखित जवाब में दावा किया कि होटल भवन को कभी अवैध निर्माण के मामले में बुक नहीं किया गया और न ही इसके खिलाफ कोई ध्वस्तीकरण कार्रवाई की गई। हालांकि, कार्यकारी अभियंता के रिकॉर्ड की जांच में यह पाया गया कि इसी भवन को वर्ष 2019 और 2020 में अवैध निर्माण के लिए दो बार बुक किया गया था और इसके खिलाफ डिमोलिशन ऑर्डर भी जारी किए गए थे। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि उपलब्ध अभिलेखों के बावजूद यह जानकारी जांच टीम से छिपाई गई, जो कि बेहद गंभीर है।
दमकल जांच रिपोर्ट में कई ऐसे तथ्य सामने आए हैं, जिन्होंने होटल के संचालन और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, हेल्थ ट्रेड लाइसेंस जय मिश्रा के नाम पर जारी किया गया था, जबकि होटल का वास्तविक संचालन लोकेश बजाज कर रहा था। स्थानीय लोगों के बयानों के आधार पर रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि आग सुबह करीब 8:15 बजे लगी, जबकि दमकल की पहली गाड़ियां लगभग 9:30 बजे मौके पर पहुंचीं। इस समय अंतराल की भी जांच की सिफारिश की गई है। इसके अलावा, पर्यटन विभाग ने होटल को सिल्वर कैटेगरी का दर्जा दे दिया, जबकि कई कमरों में न तो खिड़कियां थीं और न ही पर्याप्त वेंटिलेशन। घटनास्थल से बरामद दो जले हुए डीवीआर को डेटा रिकवरी के लिए एफएसएल, रोहिणी भेजा गया है, जिनसे हादसे से पहले और उसके दौरान की गतिविधियों के अहम सुराग मिलने की उम्मीद है।









