Maoist Organization on the Brink: मिसिर बेसरा की गिरफ्तारी के बाद माओवादी संगठन की स्थिति गंभीर

सुधीर पांडेय, चाईबासा। झारखंड में माओवादी गतिविधियों पर सुरक्षा बलों की कार्रवाई में एक महत्वपूर्ण मोड़ आया है, जब एक करोड़ के इनामी माओवादी नेता मिसिर बेसरा और
सुधीर पांडेय, चाईबासा। झारखंड में माओवादी गतिविधियों पर सुरक्षा बलों की कार्रवाई में एक महत्वपूर्ण मोड़ आया है, जब एक करोड़ के इनामी माओवादी नेता मिसिर बेसरा और उसके सहयोगी मेहनत उर्फ मोच्छू को गिरिडीह में गिरफ्तार किया गया। सुरक्षा एजेंसियों ने इस गिरफ्तारी को नक्सल विरोधी अभियान की सबसे बड़ी सफलता माना है। इससे पहले, 16 माओवादी आत्मसमर्पण कर चुके थे, जिसने सारंडा और कोल्हान क्षेत्र में संगठन की ताकत को काफी कमजोर कर दिया था। अब सुरक्षा बलों का ध्यान बचे हुए दो प्रमुख माओवादी कमांडरों असीम मंडल और सालुका कायम पर केंद्रित है, जिनकी गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। खुफिया सूत्रों के अनुसार, बेसरा की गिरफ्तारी से संगठन की सैन्य कमान को बड़ा झटका लगा है, जिससे माओवादी कैडरों का मनोबल भी प्रभावित हो सकता है। कई निचले स्तर के माओवादी आत्मसमर्पण की तैयारी में हैं, और असीम मंडल का दस्ता पहले ही काफी छोटा हो चुका है। उसके साथ अब सीमित संख्या में सदस्य सक्रिय हैं और उनकी गतिविधियां झारखंड-पश्चिम बंगाल सीमा से सटे इलाकों में बताई जा रही हैं। सुरक्षा एजेंसियां उसकी लगातार निगरानी कर रही हैं।
दूसरी ओर, सालुका कायम पोड़ाहाट क्षेत्र में सीमित नेटवर्क के साथ सक्रिय है। खुफिया एजेंसियों का मानना है कि वह संगठन के लिए लेवी और अन्य आर्थिक स्रोतों को बचाए रखने की कोशिश कर रहा है, ताकि शेष नेटवर्क संचालित हो सके। सुरक्षा बलों की उम्मीद है कि मिसिर बेसरा और मेहनत उर्फ मोच्छू से पूछताछ में हथियारों के ठिकानों, विस्फोटक भंडार, लेवी नेटवर्क, शहरी संपर्कों और फरार माओवादियों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारियां मिल सकती हैं। इन सूचनाओं के आधार पर आने वाले दिनों में झारखंड के कई जिलों में अभियान और तेज होने की संभावना है। पिछले कुछ महीनों में लगातार आत्मसमर्पण, गिरफ्तारी और सुरक्षाबलों के दबाव ने सारंडा-कोल्हान में माओवादी संगठन की रीढ़ तोड़ दी है। सुरक्षा अधिकारियों का आकलन है कि यदि असीम मंडल और सालुका कायम भी कानून के शिकंजे में आ जाते हैं या आत्मसमर्पण कर देते हैं, तो कोल्हान में माओवादी संगठन का सक्रिय ढांचा लगभग समाप्त हो जाएगा। इसके बाद सुरक्षा एजेंसियों का फोकस बचे हुए स्लीपर नेटवर्क और लेवी तंत्र को पूरी तरह खत्म करने पर रहेगा। इस प्रकार, झारखंड में माओवादी गतिविधियों पर सुरक्षा बलों की कार्रवाई ने एक नई दिशा ली है, जो राज्य में शांति और सुरक्षा की बहाली की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।









