NDA's 'Mangal Milan': एनसीपीआई पहली बार हुई शामिल, काकोली घोष ने की तारीफ

नई दिल्ली से जागरण ब्यूरो की रिपोर्ट के अनुसार, तृणमूल कांग्रेस से टूटकर 20 सांसदों के साथ गठबंधन का दूसरा सबसे बड़ा घटक दल बनने वाली नेशनलिस्ट सिटिजन पार्टी ऑफ
नई दिल्ली से जागरण ब्यूरो की रिपोर्ट के अनुसार, तृणमूल कांग्रेस से टूटकर 20 सांसदों के साथ गठबंधन का दूसरा सबसे बड़ा घटक दल बनने वाली नेशनलिस्ट सिटिजन पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआइ) ने हाल ही में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की बैठक में पहली बार भाग लिया। इस बैठक का आयोजन 'मंगल मिलन' नाम से किया गया, जो संसद सत्र के दौरान हर मंगलवार को होती है। एनसीपीआइ की सांसद सयानी घोष ने इस अवसर पर केंद्र सरकार पर तीखे हमलों के लिए चर्चित रहते हुए पेपर लीक से जुड़े विधेयक का सभी दलों से समर्थन करने की अपील की। उन्होंने कहा कि यह विधेयक सभी के हित में है और इसे पारित किया जाना चाहिए।
बैठक में मत्स्य व पशुपालन मंत्री राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह ने मछली उत्पादन के क्षेत्र में हुई प्रगति के बारे में जानकारी दी, जबकि वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने विभिन्न देशों के साथ हुए मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) से घरेलू उद्योगों और विशेषकर सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSME) को मिले नए अवसरों पर प्रजेंटेशन दिया। इस बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अलावा रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह, स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा, सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी, पीयूष गोयल, संसदीय कार्य मंत्री किरन रिजिजू और अन्य एनडीए घटक दलों के सांसद भी शामिल थे।
बैठक के बाद एनसीपीआइ की सांसद सायोनी घोष ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में यह एक ज्ञानवर्धक और जानकारीपूर्ण बैठक थी। उन्होंने कहा कि आज एफटीए पर सकारात्मक चर्चा हुई। एनसीपीआइ की चीफ व्हिप काकोली घोष दस्तीदार ने भी बैठक की तारीफ की और कहा कि हमें देश की प्रगति, एफटीए और किसानों के बारे में आंकड़ों के साथ जानकारी मिली। उन्होंने कहा कि इस जानकारी के माध्यम से हम लोगों को इन मुद्दों के बारे में बेहतर समझा पाएंगे। काकोली घोष ने बैठक की व्यवस्था की सराहना करते हुए कहा कि 'हमने पहले कभी ऐसा नहीं देखा। यह बैठक व्यवस्थित थी और हमें बताया गया कि कौन से बिल आने वाले हैं।' इस प्रकार, एनसीपीआइ का राजग में शामिल होना और इस बैठक में भाग लेना एक महत्वपूर्ण घटना है, जो भविष्य में राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकती है।









