New Law on Paper Leak: रामगोपाल यादव ने उठाए सवाल

केंद्र सरकार ने पेपर लीक की समस्या को रोकने के लिए एक नया कानून पेश किया है, जिसके तहत परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए एक हाई पावर टास्क फोर्स भी गठित की गई है
केंद्र सरकार ने पेपर लीक की समस्या को रोकने के लिए एक नया कानून पेश किया है, जिसके तहत परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए एक हाई पावर टास्क फोर्स भी गठित की गई है। हालांकि, समाजवादी पार्टी के राज्यसभा सांसद रामगोपाल यादव ने इस नए कानून पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि केवल कानून बनाने से पेपर लीक की समस्या का समाधान नहीं होगा। असली समस्या उस व्यवस्था में है, जहां प्रश्नपत्र तैयार किया जाता है, उसे छापा जाता है और फिर उसे बाहर भेजा जाता है। यादव के अनुसार, पेपर लीक की जड़ कहीं और है, और जब तक उस व्यवस्था में सुधार नहीं किया जाएगा, तब तक कानून बनते रहेंगे, लेकिन लीक की घटनाएं नहीं रुकेंगी।
रामगोपाल यादव ने न्यूज एजेंसी ANI से बातचीत करते हुए कहा कि पेपर लीक पर नया कानून बनाने से समस्या का समाधान नहीं होगा। उन्होंने यह भी बताया कि प्रश्नपत्र वहीं से लीक होता है, जहां उसे तैयार किया जाता है या छापा जाता है। इसके अलावा, कई बड़े कोचिंग सेंटरों पर भी पेपर लीक के आरोप लगते रहे हैं। यादव का कहना है कि जब तक इन कमजोर कड़ियों पर कार्रवाई नहीं की जाएगी, तब तक केवल कानून बनाने से कोई नतीजा नहीं निकलेगा। यह स्पष्ट है कि समस्या की जड़ें कहीं और हैं और उन्हें पहचानना और सुधारना आवश्यक है।
इसके साथ ही, रामगोपाल यादव ने डिजिटल व्यवस्था पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि नंदन नीलेकणि की अगुवाई में बनाई गई हाई पावर टास्क फोर्स पर भी उन्हें संदेह है। उनका कहना है कि जब से परीक्षा प्रक्रिया अधिक डिजिटल हुई है, तब से गड़बड़ियों में भी वृद्धि हुई है। डिजिटल सिस्टम में हैकिंग और डेटा लीक करना आसान हो गया है, इसलिए केवल तकनीक पर निर्भर रहकर समस्या का समाधान नहीं किया जा सकता। जब उनसे पूछा गया कि क्या संसद में इस मुद्दे पर चर्चा होगी, तो उन्होंने कहा कि सदन चलेगा तब तो चर्चा होगी। इसके अलावा, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की उस टिप्पणी पर भी यादव ने प्रतिक्रिया दी, जिसमें उन्होंने अखिलेश यादव के देर से उठने का जिक्र किया था। कुल मिलाकर, रामगोपाल यादव ने सरकार के नए कानून की प्रभावशीलता पर सवाल उठाते हुए कहा कि पेपर लीक की समस्या का समाधान केवल कानून से नहीं, बल्कि पूरे परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी और सुरक्षित बनाने से ही संभव है।









