New Registration Rules in UP: उत्तर प्रदेश में जन्म-मृत्यु पंजीकरण के नए नियम लागू

उत्तर प्रदेश सरकार ने जन्म और मृत्यु पंजीकरण की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित और तकनीक आधारित बनाने के लिए उत्तर प्रदेश जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रीकरण नियमावली, 2026
उत्तर प्रदेश सरकार ने जन्म और मृत्यु पंजीकरण की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित और तकनीक आधारित बनाने के लिए उत्तर प्रदेश जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रीकरण नियमावली, 2026 को लागू कर दिया है। इस नई नियमावली में जन्म या मृत्यु की सूचना देने की समय सीमा, विलंबित पंजीकरण, चलती ट्रेन, बस, विमान या नाव जैसे यानों में जन्म अथवा मृत्यु की स्थिति, प्रमाण-पत्र जारी करने की प्रक्रिया और रिकार्ड के डिजिटलीकरण सहित कई महत्वपूर्ण प्रावधान शामिल किए गए हैं। इसके साथ ही, जन्म, मृत्यु और मृत-जन्म रजिस्टरों को स्थायी अभिलेख घोषित किया गया है, जिन्हें नष्ट नहीं किया जाएगा। रजिस्ट्रार एक वर्ष तक अभिलेख अपने कार्यालय में सुरक्षित रखेगा, इसके बाद उन्हें जिला रजिस्ट्रार के पास सुरक्षित अभिरक्षा में भेज दिया जाएगा। इस संबंध में अपर मुख्य सचिव अमित कुमार घोष द्वारा अधिसूचना जारी की गई है।
नई नियमावली के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति का जन्म या मृत्यु किसी चलित यान में होती है, तो संबंधित यान का प्रभारी इसकी सूचना पहले ठहराव वाले स्थान के जन्म एवं मृत्यु रजिस्ट्रार को देगा या दिलवाएगा। नियमावली में यान की परिभाषा केवल ट्रेन या विमान तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें नाव, जहाज, मोटर कार, बस, मोटरसाइकिल, तांगा, रिक्शा तथा भूमि, जल और वायु में चलने वाले सभी प्रकार के वाहन शामिल हैं। इस प्रावधान का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि यात्रा के दौरान हुई घटनाओं का समय पर और सही स्थान पर पंजीकरण हो सके, ताकि बाद में जन्म या मृत्यु प्रमाणपत्र प्राप्त करने में किसी प्रकार की कानूनी या प्रशासनिक समस्या न आए। इसके अतिरिक्त, बच्चों के नाम दर्ज कराने को लेकर भी महत्वपूर्ण व्यवस्था की गई है। यदि किसी नवजात का जन्म बिना नाम के पंजीकृत कराया गया है, तो माता-पिता या अभिभावक जन्म पंजीकरण की तिथि से 12 माह के भीतर रजिस्ट्रार को बच्चे का नाम मौखिक अथवा लिखित रूप से बता सकते हैं।











